Business Desk – Dollar vs Rupee : डॉलर के मुकाबले रुपया 5 नवंबर को मजबूत होकर 94.64 के स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय करेंसी को सहारा मिला। इससे भारत के तेल आयात बिल और डॉलर की मांग घटने की उम्मीद भी बढ़ी है।

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त और अमेरिका-ईरान तनाव के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई। इसका असर डॉलर और रुपए की चाल पर भी दिखाई दिया।

डॉलर कमजोर हुआ, रुपए को कैसे मिला फायदा?

5 नवंबर को उपलब्ध बाजार डेटा के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपया 94.64 पर रहा। पिछले बंद भाव 94.75 की तुलना में इसमें करीब 11 पैसे की मजबूती आई। कारोबार के दौरान USD/INR का दायरा 94.50 से 94.88 रहा।

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट से भी रुपए को सहारा मिला। डॉलर कमजोर होने पर दूसरी मुद्राओं के मुकाबले रुपए जैसी करेंसी को मजबूती मिल सकती है।

कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को राहत की उम्मीद

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसके लिए भुगतान डॉलर में किया जाता है। ऐसे में तेल की कीमतें घटने पर भारत को तेल खरीदने के लिए कम डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं।

5 नवंबर को एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 8.5% गिरकर 94.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव नतीजों के बाद ईरान के साथ तनाव के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को इसकी बड़ी वजह माना गया।

रुपया मजबूत होने से आम लोगों को क्या फायदा?

डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से विदेश से आने वाली चीजों का आयात सस्ता पड़ सकता है। इसका असर कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और दूसरे आयातित सामान की लागत पर हो सकता है।

पेट्रोल-डीजल: तेल आयात की लागत घटने से राहत की गुंजाइश बन सकती है, लेकिन इसका असर तुरंत पेट्रोल पंप पर कीमतों में दिखना जरूरी नहीं है।

विदेश में पढ़ाई: डॉलर में फीस देने वाले छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिल सकती है।

विदेश यात्रा: डॉलर खरीदने की लागत कम हो सकती है। आयात करने वाली कंपनियां: कच्चा माल और दूसरे सामान खरीदने की लागत घट सकती है।

निर्यातकों को नुकसान: रुपया मजबूत होने पर डॉलर में होने वाली कमाई को रुपए में बदलने पर कम रकम मिल सकती है।

आगे रुपए की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?

रुपए की मजबूती कितनी टिकेगी, यह कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल, विदेशी निवेश और अमेरिका-ईरान तनाव की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर तेल की कीमतों में गिरावट बनी रहती है, तो रुपए को और सहारा मिल सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना हुआ है।