मकर संक्रांति पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले पर लगा ग्रहण, श्रद्धालुओं के साथ व्यापारी भी मायूस, जानिए क्या है वजह…

अमर मंडल, पखांजुर। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से भारत की आर्थिक, संस्कृति और पारंपरिक गतिविधियों पर ग्रहण लग चुका है. कोरोना के कारण मक्रर सक्रांति के उपलक्ष्य में प्रति वर्ष होने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के दूसरा सबसे बड़ा व प्रसिद्ध पखांजुर नर नारायण सेवा आश्रम में लगने वाला मेला नहीं लगा.

बता दे कि वर्ष 1964 से शुरू हुआ पखांजुर नरनारायण सेवा आश्रम की ओर से मेले का संचालन किया जा रहा है. लेकिन कोरोना की वजह से 57 साल पुरानी परंपरा इस साल टूट गई है. मेले में पूरे परलकोट के साथ आसपास के राज्य महाराष्ट्र, ओडिसा, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश और बंगाल तक के कई व्यापारी व श्रद्धालु अपने पूरे परिवार व मित्रों के साथ आता करते थे. इस ऐतिहासिक मेला में करोड़ों रुपए का व्यापार होता था.

बड़े-बड़े झूले का रहता था आकर्षण

बड़े-बड़े झूले, डांस पार्टी, मोटरसाइकिल का सर्कस, प्रसिद्ध भेलपुरी और रंग-बिरंख मिष्ठान मेले की शान हुआ करता थे. लेकिन कोरोना की वजह से मेले की जगह में आज सन्नाटा पड़ा हुआ है. मेला नहीं लगाने से व्यापारी में निराशा देखी जा रही हैं, मेले में न केवल छत्तीसगढ़ से बल्कि दूसरे राज्यों के व्यापारी आया करते थे. लेकिन इस बार पखांजुर नर नारायण सेवा आश्रम में मेला नहीं लगने से व्यापारियों को निराश कर दिया है.

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