Dharm Desk – आज के समय में अधिकांश अभिभावक के सामने एक बहुत बड़ी और गंभीर चुनौती यह बनी हुई है कि उनके बच्चे या तो पढ़ाई लिखाई में बिल्कुल ध्यान नहीं लगाते या फिर स्वभाव से इतने ज्यादा जिद्दी हो गए हैं कि वे बड़ों की बात सुनने को तैयार ही नहीं होते।बहुत बार बच्चों का यह अड़ियल रवैया और आक्रामक स्वभाव परिवार में तनाव का मुख्य कारण बन जाता है। अभिभावक बच्चों को सुधारने के लिए प्यार, डांट-डपट और हर तरह के प्रयास करते हैं।लेकिन मनचाहा परिणाम नहीं मिलता। ऐसे में पारंपरिक जीवनशैली और लोक गाथाओं में कुछ ऐसे सरल उपायों का जिक्र मिलता है।जिन्हें आजमाने से बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों और बुजुर्गों का मानना है कि बच्चों का मन और उनकी ऊर्जा बहुत संवेदनशील होती है।बहुत बार घर का माहौल या बच्चों की मानसिक स्थिति के कारण वे अपने रास्ते से भटक जाते हैं और बात-बात पर जिद करने लगते हैं।ऐसे बच्चों को सही दिशा देने और उनके अंदर छिपी हुई ऊर्जा को सकारात्मक रूप में ढालने के लिए कुछ विशेष विधान बताए गए हैं। यह प्रयोग न केवल बहुत ही सरल हैं बल्कि इन्हें करने के लिए किसी बड़े तामझाम या जटिल प्रक्रिया की भी आवश्यकता नहीं होती है। जरूरत है तो बस सच्चे मन और पूरे विश्वास के साथ इसे अपनाने की।

मंगलवार का दिन इसके लिए सबसे अच्छा होता है। इस दिन आपको एक बहुत ही आसान सी प्रक्रिया पूरी करनी है।

  1. मंगलवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे जाएं और वहां से गिरा हुआ एक साफ-सुथरा पत्ता ले आएं।
  2. उस पत्ते को घर लाकर गंगाजल से अच्छी तरह साफ और पवित्र कर लें।
  3. उस पत्ते पर एक साबुत सुपारी, दो लौंग और थोड़ा सा सिंदूर चढ़ाए।
  4. अब इस पूरी सामग्री को अपने बच्चे के हाथों से बजरंगबली के मंदिर में चढ़वा दें।