रायपुर। अग्रवाल सभा के आमसभा की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, समाज के भीतर हलचल तेज होती जा रही है. इस बार सबसे बड़ा मुद्दा अध्यक्ष के चुनाव का है. जो कोरोना की वजह से सालों से अटका हुआ है. समय के साथ बढ़ती अपेक्षाओं के बीच अब समाज अध्यक्ष पद का फैसला बंद कमरों में नहीं, बल्कि सबसे सामने होने की उम्मीद लगाए हुए है. लोगों का कहना है कि भले ही अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से हो, लेकिन आमसभा में सबके बीच होना चाहिए.

अग्रवाल सभा रायपुर से एक-दो नहीं बल्कि समाज के 11,200 लोग जुड़े हुए हैं. सभा का अपना संविधान है, जिसके अनुसार, अध्यक्ष के अलावा 13 पदाधिकारी होंगे. इसके अलावा कार्यकारिणी में 51 सदस्यों का प्रावधान है. सभा में बीते 18-20 सालों से सभा में एक तरह ही परिपाटी बना दी गई है, जिसमें बंद कमरे में अध्यक्ष का चुनाव हो जाता है, जिसके बाद वे अपने पदाधिकारियों का चयन कर लेते हैं. ऐसे में कोरोना के आगमन ने एक तरह से इस परिपाटी को बरकरार रखने वालों लोगों के लिए संजीवनी बनकर आई है.

कोरोना की वजह से चुनाव हुए नहीं, जैसे व्यवस्था थी, वैसे ही चल रही है. कोई बदलाव की बात करे तो उसे दरकिनार कर दिया जा रहा है. ऐसे में समाज के भीतर से चीजों के पारदर्शी तरीके से अंंजाम दिए जाने की बात उठने लगी है. सभा से जुड़े समाज के लोगों में बंद कमरे की कवायद को लेकर गुस्सा फूटने लगा है और उनका कहना है कि भले ही अध्यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से हो, लेकिन आमसभा में सभी लोगों की मौजूदगी में होना चाहिए. अगर सर्वसम्मति नहीं बन पाती है, तो जरूर चुनाव कराए जाने चाहिए.

सभा से जुड़े अग्रवाल समाज के सदस्यों की भावनाओं से सहमति जताते हुए सभा के पूर्व अध्यक्ष नवल अग्रवाल कहते हैं कि सर्वसम्मति से अगर अध्यक्ष का चयन नहीं हो पाता है तो सभी लोगों के सामने चुनाव होना चाहिए. वहीं कोरोना के दौरान चुनाव को टालने के बाद अब आगे भी ऐसी किसी कवायद से इंकार करते हुए वे कहते हैं कि नए नेतृत्व का चयन होगा ही. वहीं दूसरी ओर प्रक्रिया को लेकर न्यायालय की शरण में जाने पर वे आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि समाज की बातें समाज के भीतर ही तय होनी चाहिए.


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वहीं अग्रवाल सभा के महामंत्री विजय अग्रवाल कहते हैं कि समाज लोग अब बंद कमरे की सियासत नहीं चाहते हैं. सारी बातें खुले में उनके सामने होनी चाहिए. जो भी फैसला लिया जाए, आमसभा में लिया जाए. वे कहते हैं कि सभा की एक-एक गतिविधि पर पूरे प्रदेश के समाज के लोगों की निगाहें रहती हैं. सभा में लिए गए फैसले इन तमाम लोगों के नजीर बनते हैं. ऐसे अध्यक्ष पद का चुनाव सभा के सदस्यों की प्राथमिक मांग है. इस फैसले की धमक पूरे प्रदेश में सुनाई पड़ेगी.

अग्रवाल समाज के सदस्य मनमोहन अग्रवाल भी कहते हैं कि मुख्य सवाल ये है कि आम सहमति के नाम पर क्या बंद कमरे में बैठकर कुछ लोगों के द्वारा किसी का नाम तय कर देना चाहिए या पूरे समाज की सहभागिता से खुली प्रक्रिया के द्वारा चयन / चुनाव किया जाना चाहिए. सभा आज एक ऐसे मुकाम पर खड़ा है, जहां उसे भविष्य के लिए दिशा तय करनी है. निश्चित ही समाज के लोगों की मंशा के अनुरूप अध्यक्ष का चयन/चुनाव आमसभा में सबके बीच ही सही रास्ता है.

वहीँ इस मामले में अग्रवाल सभा के आजीवन सदस्य अमित अग्रवाल ने बताया कि अग्रवाल सभा के एक गुट के द्वारा अग्रवाल समाज के मामले को न्यायलय में ले जाया गया इससे समाज के लोगों में रोष व्याप्त है. जबकि समाज के मामले को समाज के लोगों के बीच ही आपस में बैठकर सुलझा लेना चाहिए, ऐसा समाज के हर वर्ग के लोगों की अपेक्षा है.

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