पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के साये के बीच इजरायल में मंगलवार को आम चुनाव होने जा रहे हैं. ये इजराइल के इतिहास का महत्वपूर्ण चुनावों में से एक माना जा रहा है. इस बार नेतन्याहू के बजाय पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार हैं. छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट के गठबंधन को ज्यादा सीटें दी गई हैं.
इजरायल के चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता बचाने की चुनौती के बीच राअम पार्टी चर्चा में है. देश की संसद नेसेट में 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है.
अभी तक के ओपिनियन पोल में दावा किया जा रहा है कि इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के बीच मुकाबले को अहम माना जा रहा है. नेतन्याहू की पार्टी लिकुड है. उनके साथ कई दक्षिणपंथी और कट्टर धार्मिक दलों का समर्थन है. दूसरी ओर, गादी आइजेनकोट अपनी नई पार्टी याशार के साथ नेतन्याहू को चुनौती दे रहे हैं. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए अब तक की सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा माना जा रहा है.
देश के 73 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता इस बात का फैसला करने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू प्रधानमंत्री बने रहेंगे या फिर वहां की जनता जनार्दन कोई और चेहरा को मौका देगी.
नेतन्याहू इजराइल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं. वे अलग-अलग कार्यकालों को मिलाकर कुल 17 वर्ष अधिक समय तक इजराइल के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दे चुके हैं.
ट्रंप के लिए इजराइल का चुनाव केवल एक पड़ोसी या सहयोगी देश का अंदरूनी मामला नहीं है, बल्कि ये अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति, क्षेत्रीय स्थिरता, और खुद ट्रंप की विदेश नीति की सफलता से सीधे जुड़ा हुआ है.
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