नितिन नामदेव, रायपुर। रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर में टाटा पावर को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का आरोप लगाते हुए पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने न्यायालय में याचिका दायर की। उपाध्याय ने भाजपा सरकार का जनविरोधी चेहरा उजागर होने की बात कहते हुए इसे टाटा पावर के बहाने छत्तीसगढ़ की जनता और बिजली व्यवस्था को पूंजीपतियों के हाथ बेचने का षड्यंत्र करार दिया है। उन्होंने बीजेपी पर ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के जरिए मुफ्त बिजली के फर्जी जाल में जनता को फांसने का आरोप लगाया।

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पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने बताया कि टाटा पावर कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका (पीटीशन नं. 89 ऑफ 2026) लगाकर रायपुर, धरसीवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्र में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस (पैरालेल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस) माँगा गया है। मैं इस जनविरोधी, गरीब-विरोधी और छत्तीसगढ़-विरोधी प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करता हूँ।

उपाध्याय ने इसके साथ ही भाजपा की राज्य और केंद्र सरकार से सवाल किए, जिसमें टाटा ने अपनी लाइसेंस एप्लीकेशन में आगामी 5 वर्ष में चाहे गये क्षेत्र में सीएसपीडीसीएल के बराबरी का नेटवर्क स्थापित करने हेतु चरणबद्ध तरीके से केवल 435 करोड़ राशि लगाने की जानकारी दी है। इतनी कम राशि में संपूर्ण क्षेत्र में बिजली वितरण व्यवस्था के लिए नए 33 एवं 11 केवी सबस्टेशन तथा लाइन बनाना असंभव है। अंततः टाटा पॉवर सीएसपीडीसीएल के ग्रिड के लघुकलिक उपयोग / पिगी बैकिंग हेतु मांग करेगा और सरकार इसमें टाटा का पूर्ण सहयोग करेगी।

उन्होंने अन्य राज्यों में निजी समानांतर लाइसेंस का जिक्र करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में निजी वितरण कंपनियों का प्रयोग पूरी तरह विफल साबित हुआ है। निजी कंपनियाँ केवल मुनाफा कमाने के लिए काम करती हैं, मेंटेनेंस के नाम पर उपभोक्ता को बेसहारा छोड़ देती हैं, और बिल कई गुना बढ़ा देती हैं, जिसके कारण जनता पर दोहरी मार पड़ती है. वहीं स्मार्ट मीटर के नाम पर जनता की जेब पर डाका का आरोप लगाते हुए कहा कि सीएसपीडीसीएल ने टाटा के फायदे के लिए उसी से ही स्मार्ट मीटर लगाया है।

इसके साथ उन्होंने भविष्य में प्रति यूनिट बिजली दरों की आसमान छूने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनी के प्रवेश से भविष्य में बिजली दरें बेतहाशा बढ़ेंगी। जब सरकारी कंपनी कमजोर हो जाएगी, तो टाटा पावर जैसी निजी कंपनियाँ अपनी एकाधिकार (मोनोपॉली) स्थापित करेंगी और व्हीलिंग चार्ज व अन्य उपकरों के बहाने प्रति यूनिट दर में अप्रत्याशित वृद्धि कर जनता का शोषण करेंगी। अंत में उन्होंने सरकारी संस्था सीएसपीडीसीएल को खत्म करने टाटा पावर के बहाने छत्तीसगढ़ की जनता और बिजली व्यवस्था को पूंजीपतियों के हाथ बेचने का षड्यंत्र करार दिया है.

विकास उपाध्याय ने कहा कि सीएसईआरसी में दाखिल याचिका क्रमांक 89/2026 के तहत टाटा पावर के लाइसेंस आवेदन को तुरंत निरस्त किया जाए। यदि भाजपा सरकार ने अपने इस जनविरोधी फैसले को लेगी और छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक बिजली संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश करेगी, तो कांग्रेस पार्टी रायपुर की सड़कों से लेकर विधानसभा तक उग्र आंदोलन करेगी और जनता के हक की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगी। याचिका अधिवक्ता शशांक मिश्रा, शुभेंद्रु प्रकाश राय, संतोष कुमार के माध्यम से लगाया गया।

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