सत्यपाल सिंह राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर CBSE पैटर्न का झांसा देकर अभिभावकों और बच्चों को गुमराह करने का बड़ा घोटाला सामने आया है. बिना CBSE संबद्धता के स्कूल CBSE पैटर्न, NCERT किताबें और महंगी फीस वसूल रहे हैं, लेकिन बच्चों को अब सीजी बोर्ड की केंद्रीकृत परीक्षा देनी पड़ रही है.

छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन ने शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर सख्त आदेश की मांग की है, लेकिन विभाग नहीं जागा और हर साल शुल्क, पुस्तक और ड्रेस के नाम पर सैकड़ों करोड़ हर साल अभिभावकों से वसूली जारी है.

चौंकाने वाले आंकड़े

राज्य में कुल 57053 स्कूल हैं, जिनमें 6800 निजी स्कूल है, इनमें 6100 सीजी बोर्ड हिंदी-अंग्रेजी माध्यम है 520 वास्तविक CBSE संबद्ध और मात्र 24 ICSE हैं. नवंबर में पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष ने 1784 सीजी बोर्ड मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची जारी किया जिसमें लिखा है कि इन निशुल्क किताबें नहीं लीं है. बदले में महंगी किताबें बेची गई है.

जिलेवार आंकड़ा – CG बोर्ड की निःशुल्क पुस्तक नहीं लेने वाले स्कूलों की संख्या

रायपुर – 107, बिलासपुर 157, दुर्ग 135, जांजगीर-चंपा 106, सूरजपुर 106, सरगुजा 85, बलौदाबाजार-भाटापारा -43, गरियाबंद 25, धमतरी-31 महासमुंद 66, मुंगेली 74, रायगढ़ 73, कोरबा- 89, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही -23, सक्ती 89, सारंगढ़-बिलाईगढ़- 45, बालोद 36, बेमेतरा, 43, कबीरधाम (कवर्धा), 36, राजनांदगांव 51, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, 15, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी 12, कोरिया 30, बलरामपुर-रामानुजगंज 39, जशपुर 72, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB)42, बस्तर 40, कोंडागांव 17, नारायणपुर 6, कांकेर 47, दंतेवाड़ा, बीजापुर 7, सुकमा 4

बगैर पाठ्यपुस्तक कैसे देंगे विद्यार्थी केंद्रीकृत परीक्षा?

जब 17,00 से ज़्यादा स्कूलों ने CG बोर्ड की पुस्तक ही नहीं ली है, पूरे सत्र पढ़ाई बहरी प्रकाशनों ये पुस्तकों से की गई है, तो परीक्षा बच्चे CG बोर्ड के पुस्तकों से कैसे दे पाएंगे. ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ रहे लाखों बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है, उनका एक साल ख़राब होना तय है. बावजूद शिक्षा विभाग मौन है. कार्रवाई नहीं करने के पीछे अधिकारियों पर साठ-गांठ कर करोड़ों रुपए हजम करने का आरोप लगाया जा रहा है.

हाई कोर्ट में लगी है याचिका

हाई कोर्ट में लगे एक याचिका में उल्लेखित किया गया है कि राज्य में करीब 2,000 फर्जी CBSE स्कूल चल रहे हैं, जिन्हें शिक्षा विभाग के रिश्वतखोर अधिकारी संरक्षण दे रहे हैं. आरटीई के गरीब, वंचित छात्रों को भी महंगी फर्जी CBSE किताबें खरीदनी पड़ रही हैं, या स्कूल छोड़ना पड़ रहा है. स्कूल मालिक प्रीमियम फीस लेकर मर्सिडीज, वोल्वो और ऑडी जैसी लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं.

ज्ञापन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं

प्रदेश अध्यक्ष किष्टोफर पॉल ने कहा कि एक दर्जन से अधिक बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा, स्कूलों को सीजी बोर्ड से मान्यता है, लेकिन CBSE पैटर्न दिखाकर मोटी फीस और प्राइवेट प्रकाशकों की 8,000-10,000 रुपये वाली किताबें बेची जा रही हैं. अब जब सीजी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो गई है, तो बच्चे और अभिभावक यह भी नहीं जानते कि किस बोर्ड की परीक्षा दे रहे हैं. हजारों गरीब बच्चों का भविष्य जानबूझकर बर्बाद किया जा रहा है.

अभिभावकों को किया गया भ्रमित

एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा विभाग डीपीआई के पुराने आदेश का हवाला दिया कि सीजी बोर्ड स्कूलों में एससीईआरटी किताबें और CBSE स्कूलों में एनसीईआरटी किताबें ही इस्तेमाल होंगी. लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा. प्रपत्र-1 में मान्यता, नवीनीकरण के लिए CBSE Pattern to be affiliated to CBSE या likely to be affiliated with CBSE लिखना गैरकानूनी है, फिर भी दर्जनों स्कूल ऐसा कर अभिभावकों को भ्रमित कर रहे हैं.

स्कूल शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश

विकास तिवारी ने 11 मार्च 2026 को मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष जनहित याचिका में इन 1784 स्कूलों की सूची सौंप दी. डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता देखते हुए स्कूल शिक्षा सचिव को 24 मार्च 2026 तक शपथ-पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है. विभाग के अधिकारी और स्कूल संचालक मिलीभगत कर बच्चों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की ऐसे स्कूलों का मान्यता नवीनीकरण रोका जाए और मान्यता देने वाले जिला शिक्षा अधिकारी व नोडल अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए.

पैरेंट्स एसोसिएशन ने लगाए गंभीर आरोप

पैरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि शिक्षा सचिव से तत्काल सख्त आदेश जारी करने की अपील करते रहे, लेकिन वो पैसों की खनक में गुहार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. सभी निजी स्कूल संबंधित बोर्ड सीजी, सीबीएसई की आधिकारिक किताबों और पाठ्यक्रम से ही पढ़ाई कराएं. फर्जी CBSE पैटर्न वाले स्कूलों पर तुरंत अंकुश लगाया जाए, जिला स्तर पर निगरानी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता देश में 33 राज्यों में 32वें स्थान पर है. पैरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो लाखों बच्चों का भविष्य हमेशा के लिए अंधकार में डूब जाएगा.

इस मामले पर लल्लूराम डॉट कॉम ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उनके पीए ने जानकारी दी कि वह बैठक में व्यस्त हैं, जिसके चलते उनसे संपर्क नहीं हो सका.