अभय मिश्रा, मऊगंज। जिला मुख्यालय की कानून व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी है। अपराधियों के मन से वर्दी का खौफ इस कदर खत्म हो चुका है कि अब खुलेआम, बीच चौराहे पर खूनी खेल खेला जा रहा है। ताजा मामला सीएम राइज स्कूल के सामने का है। जहां ‘गुप्ता परिवार’ के रसूखदार लड़कों ने आतंक मचाते हुए एक निर्दोष मिस्त्री की जिंदगी दांव पर लगा दी।
तमाशबीन पुलिस और सड़कों पर ‘तांडव’
हैरानी की बात यह है कि थाने से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर आधे घंटे तक गुंडागर्दी चलती रही। हमलावरों ने संतलाल साकेत को निशाना बनाने से पहले कई अन्य लोगों के साथ भी मारपीट की, लेकिन गश्त का दावा करने वाली मऊगंज पुलिस गहरी नींद में सोती रही। जब लहूलुहान संतलाल की आंखों से खून बहने लगा और वो चलने में असमर्थ हो गया, तब जनता की सूचना पर पुलिस की नींद टूटी।
खानापूर्ति में जुटी मऊगंज पुलिस!
घटनास्थल पर पुलिस का रवैया संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर गया। दो गाड़ियां मौके पर तो पहुंचीं, लेकिन पुलिस ने वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने की जहमत तक नहीं उठाई। घायल को डायल 112 में लादकर अस्पताल भेज दिया गया और पुलिसिया कार्रवाई ‘खानापूर्ति’ तक सिमट कर रह गई।

