पवन राय, मंडला। प्रदेश की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला जहां सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे किए जाते हैं। लेकिन आरोप है कि यहां एक 21 वर्षीय युवक की जिंदगी सिस्टम की लापरवाही के कारण खत्म हो गई। परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन वाली एंबुलेंस देर से पहुंची। डॉक्टर की अनुमति का बहाना बनाकर रास्ते में ऑक्सीजन नहीं दी गई और जब ऑक्सीजन लगाया तो जिला अस्पताल पहुंचने से पहले सिलेंडर ही खाली हो गया। अगर ये आरोप सही हैं तो सवाल सिर्फ एक युवक की मौत का नहीं बल्कि उस पूरे सिस्टम का है जिसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
मंडला जिले के सुनहरा माल गांव का रहने वाला 21 वर्षीय अजीत बरया पिछले कई महीनों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। जिला अस्पताल में उसका नियमित डायलिसिस चल रहा था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार अस्पताल से डायलिसिस का समय बदलने और बेहतर इलाज की मांग की लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। परिवार का दावा है कि अगर समय पर इलाज मिलता तो शायद आज अजीत जिंदा होता।
बीमारी बढ़ी उखड़ने लगीं सांसें, परिवार ने 108 एंबुलेंस को किया फोन
परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद पहुंची। इतना ही नहीं मौके पर मौजूद स्टाफ ने डॉक्टर की अनुमति का हवाला देकर ऑक्सीजन लगाने से इनकार कर दिया। ऐसे में सवाल यह है कि जब मरीज की हालत गंभीर थी तो क्या प्राथमिक उपचार देना जरूरी नहीं था ? क्या नियमों का हवाला देकर एक मरीज की जिंदगी को इंतजार कराया गया?
परिजनों के मुताबिक मरीज को सीधे जिला अस्पताल ले जाने के बजाय पहले बम्हनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने तत्काल ऑक्सीजन लगाने और जिला अस्पताल रेफर करने के निर्देश दिए लेकिन आरोप है कि मंडला पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। जैसे ही ऑक्सीजन बंद हुई वैसे ही अजीत की सांसें भी टूटने लगीं और जिला अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी मौत हो गई।
यह सिर्फ एक युवक की मौत का मामला नहीं बल्कि मंडला की स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल हैं। मंडला प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री और पीएचई मंत्री सम्पतिया उइके का गृह जिला है। ऐसे में विपक्ष और स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जब मंत्री के अपने जिले में ही गंभीर मरीजों को समय पर ऑक्सीजन और बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मिलने पर सवाल उठ रहे हैं तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है क्या जिला स्वास्थ्य प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है ? क्या सरकार के दावों के अनुरूप जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं और अगर व्यवस्था में कहीं लापरवाही हुई है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी मंडला में एंबुलेंस की देरी डॉक्टरों की कमी रेफर सिस्टम और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। लेकिन हर बार जांच के आदेश दिए जाते हैं और कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस बार भी स्वास्थ्य विभाग जांच की बात कर रहा है।
अब नजर राजनीति पर भी है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग सीधे प्रदेश सरकार के अधीन है और मंडला का प्रतिनिधित्व खुद प्रदेश की कैबिनेट मंत्री सम्पतिया उइके करती हैं। ऐसे में विपक्ष सवाल उठा रहा है कि जब मंत्री के अपने जिले में ही मरीज ऑक्सीजन के लिए दम तोड़ रहे हैं तो प्रदेश के बाकी जिलों की स्थिति कैसी होगी ? अब निगाहें इस बात पर हैं कि मंत्री इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करती हैं ?
न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होगी। लेकिन अगर जांच में यह साबित होता है कि एक युवक की आखिरी सांस ऑक्सीजन की कमी या व्यवस्था की लापरवाही के कारण थमी तो यह सिर्फ एक मौत नहीं होगी बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता मानी जाएगी।
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