धर्मेद्र यादव, निवाड़ी। कानून की रखवाला ही कानून की धज्जियां उड़ाती नजर आईं। ओरछा तिगेला हाईवे पर एक महिला आरटीओ (RTO) और उनकी टीम पर नाबालिग युवकों के साथ बदतमीजी, गाली-गलौज और जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश का गंभीर आरोप लगा है। मामला इतना बढ़ गया कि इसे ‘बच्चों की देखभाल और संरक्षण अधिनियम 2015’ का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।

पूरा मामला ओरछा तिगेला हाईवे का है, जहाँ एक युवक अपने पिता के साथ गाड़ी से घूमने जा रहा था। इसी दौरान आरटीओ की टीम ने उनकी गाड़ी को रोका। चेकिंग के नाम पर जब कार्रवाई शुरू हुई, तो पीड़ित युवक ने पूरे वाकये का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। बस… फिर क्या था! वीडियो बनता देख ड्यूटी पर तैनात महिला कांस्टेबल और आरटीओ अधिकारी भड़क उठीं। गुस्साए अमले ने नाबालिग युवक के साथ सरेराह गाली-गलौज शुरू कर दी और उसे जबरदस्ती पुलिस/आरटीओ की गाड़ी में बैठाने का प्रयास किया।

वीडियो बनाने के लोकतांत्रिक अधिकार से बौखलाई महिला आरटीओ टीम की यह हरकत कैमरे में कैद हो गई। किसी नाबालिग के साथ इस तरह की जबरदस्ती और अभद्र व्यवहार कानूनी रूप से बेहद गंभीर है। विशेषज्ञों और कानून के जानकारों की मानें तो नाबालिग के साथ इस प्रकार की मारपीट, गाली-गलौज या जबरन वैन में डालना ‘बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम (Juvenile Justice Act, 2015)’ की धज्जियां उड़ाता है। सवाल यह उठता है कि क्या नियम-कानून सिर्फ आम जनता के लिए हैं? और क्या खाकी या सरकारी पद के रौब में नाबालिगों के अधिकारों को कुचला जाएगा?

अब देखना यह होगा कि वीडियो सामने आने और बच्चों के संरक्षण से जुड़े नियमों की अनदेखी के बाद, वरिष्ठ अधिकारी या बाल अधिकार आयोग इस दबंगई पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं।

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