पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के जैव विविधता से समृद्ध जंगलों में मकड़ियों की दो महत्वपूर्ण प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र स्थित ऋषिझरन जंगल में किए गए शोध के दौरान जाल बनाने वाली मकड़ियों (Cobweb Spiders) की दो प्रजातियां Steatoda cingulata (Thorell, 1890) और Theridula gonygaster (Simon, 1873) मिली हैं। इन दोनों प्रजातियों का छत्तीसगढ़ में पहली बार वैज्ञानिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।

यह अध्ययन मकड़ियों के वर्गीकरण एवं भौगोलिक वितरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विशेष बात यह है कि इन दोनों प्रजातियों के साथ इनके संबंधित वंश (Genera) Steatoda और Theridula का भी छत्तीसगढ़ में पहली बार रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।शोध के दौरान दोनों प्रजातियों को गरियाबंद जिले के देवभोग स्थित ऋषिझरन वन क्षेत्र से हाथों द्वारा एकत्रित किया गया। यह वन क्षेत्र ओडिशा की सीमा के समीप स्थित है।

इन दोनों मकड़ियों की शारीरिक बनावट भी इन्हें एक-दूसरे से अलग पहचान देती है। Steatoda cingulata का उदर गहरे चॉकलेटी रंग का होता है, जिसके अगले हिस्से में पीले रंग की एक रेखा पाई जाती है। वहीं Theridula gonygaster का उदर कालेपन लिए होता है, जिस पर पांच पीले रंग के विशिष्ट धब्बे दिखाई देते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अब तक जाल बनाने वाली मकड़ियों की प्रजातियों का सीमित दस्तावेजीकरण हुआ है। ऐसे में इन दोनों प्रजातियों का रिकॉर्ड राज्य की जैव विविधता और मकड़ियों के भौगोलिक वितरण संबंधी वैज्ञानिक जानकारी को समृद्ध करेगा। अध्ययन में इनकी शारीरिक संरचना का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत किया गया है, जो भविष्य में इनकी पहचान और आगे के शोध में सहायक होगा। यह शोध छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में छिपी जैव विविधता को सामने लाने तथा राज्य में मकड़ियों के वैज्ञानिक अध्ययन को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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