उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है. मुख्यमंत्री और राज्यपाल की मुलाकात के बाद अटकलों का बाजार तेज हो गया है. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम साल में है. एक साल के अंदर विधानसभा के चुनाव होने हैं. इसलिए मंत्रिमंडल विस्तार की प्रबल संभावना है. कई पुराने चेहरों को संगठन में और कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है.
बता दें कि मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा यूपी भाजपा को नया अध्यक्ष मिलने के बाद से और भी ज्यादा हो रही है. माना जा रहा है कि सरकार पीडीए समीकरण को दुरुस्त कर सकती है. मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली से लखनऊ तक मंथन चल रहा है. मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर तो कई को संगठन में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. बताया जा रहा है कि संभावित मंत्रिमंडल के फेरबदल में जातीय समीकरण पर चर्चा की जाएगी.
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मंत्रिमंडल में पिछड़े व दलित मंत्रियों का प्रतिनिधित्व व कद बढ़ाने पर मंथन किया जा रहा है. योगी कैबिनेट (Yogi Cabinet Expansion) में ऊर्जावान व युवा विधायकों को मौका मिल सकता है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का समायोजन भी इस मंत्रिमंडल में हो सकता है. मंत्रिमंडल विस्तार में आधे दर्जन नए चेहरों को मौका मिलने के आसार दिख रहे हैं.
योगी कैबिनेट में 60 मंत्रियों की गुंजाइश
योगी कैबिनेट में अभी कुल 54 मंत्री हैं. जबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्रियों तक की गुंजाइश है. इसका मतलब योगी सरकार के पास 6 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का पूरा अवसर है. जिसके चलते सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर मंथन हुआ है. इस विस्तार के साथ-साथ कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी देकर मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है.
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