नितिन नामदेव, रायपुर. गृहमंत्री अमित शाह दो दिनों तक छत्तीसगढ़ प्रवास पर थे. इस दौरान अमित शाह ने कहा कि, भ्रष्ट अधिकारियों को उल्टा लटका कर सीधा करेंगे. इसी मामले में पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा, अमित शाह जी के दौरे से कांग्रेस हमेशा घबराई हुई रहती है. कल उन्होंने आरोप पत्र जारी किया और आरोप पत्र में जो बिंदु उससे सरकार को बेनकाब किया है. निश्चित रूप से प्रदेश की जनता के सामने अब दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है.

आगे बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, जनता के एक्सेस से जो पैसे सरकारी कोस में जाना चाहिए, वह पैसे कांग्रेस के नेताओं के जेब में जा रहे हैं. इसके लिए उन्होंने चेतावनी दी है कि, आने वाले समय पर जो भ्रष्टाचारी हैं, जिन्होंने जनता की एक्सरसाइज का नुकसान किया है, सरकारी कोस में जाने वाले पैसे को अपने जेब में रख लिया है, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा.

वहीं राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ में 2023 में सरकार बनने की बात बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, मैंने तो राहुल गांधी जी का भाषण टीवी में सुना है. मुझे ऐसा कहीं नहीं दिखाई दिया कि, वह कहीं पर भी छत्तीसगढ़ के विकास की बात करें हों. वह नेशनल बैंक के कर्जदार हैं. 10 हजार करोड़ का लोन अभी तक माफ नहीं हुआ है. उन्होंने इस बात को नहीं बताया कि, शराबबंदी का क्या हुआ. उन्होंने इस बात को नहीं बताया कि, सहायता समूह का क्या हुआ. 10 लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा. 35 लाख लोगों को भत्ता दिया जाएगा, इस बात का क्या हुआ ? हमारे निराश्रित विधवा हैं, परिजकता हैं, विकलांग हैं उन लोगों को 1000 पेंशन दिया जाएगा उसका क्या हुआ.


उन्होंने कहा स्वास्थ्य सहायता समूह का कर्ज माफ हो जाएगा उसका क्या हुआ, उन्होंने नहीं दिया. खाली प्यार की दुकान खोलने की बात की है. छत्तीसगढ़ में प्यार की दुकान कही नहीं है. यहां माफियाओं की दुकान है. यह महिलाओं के साथ में विराजकता की दुकान है.

कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर बैठक पर बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, कांग्रेस की टिकट के बारे में यह है कि, मौत और कांग्रेस की टिकट के बारे में कोई भरोसा नहीं है. आप भी इंतजार करते रहिए, मैं भी इंतजार करता हूं.

कवासी लखमा के इंडिया गठबंधन से बीजेपी, मोहन भागवत और पीएम मोदी का दिमाग पंचर हो गया है वाले बयान पर बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, कवासी लखमा जी अपने प्रश्नों का जवाब विधानसभा में नहीं दे सकते. मैं उनका जवाब देना औचित्य नहीं मानता.

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