नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की न्यायिक नियुक्तियों से जुड़ी कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में उन्होंने कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार से उम्मीदवारों पर बातचीत करने की प्रथा पर चिंता जताई है।

कॉलेजियम की बैठक में छठे नाम पर विवाद

जस्टिस कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में छह रिक्त पदों को भरने के लिए हुई कॉलेजियम बैठक से पहले पांच नामों पर सहमति बन चुकी थी। हालांकि, बैठक के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने आखिरी समय में छठा नाम प्रस्तावित किया और सरकार की राय लेने पर विचार किया। कौल ने इस नाम पर असहमति जताई।

उन्होंने कहा कि सरकार से परामर्श और औपचारिक चर्चा से पहले उसकी मंजूरी लेना अलग-अलग बातें हैं। उनके अनुसार, ऐसी प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।

कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए जस्टिस कौल ने कहा कि नियुक्तियों को लेकर मतभेदों से दोनों न्यायाधीशों के संबंधों में तनाव आया। वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर चिंता जताई।

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