Business Desk – FPI Investment in India: भारतीय शेयर बाजार के लिए नवंबर की शुरुआत अच्छी रही है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने लगातार दो महीने तक बिकवाली करने के बाद भारतीय शेयर बाजार में फिर खरीदारी शुरू कर दी है।
नवंबर के शुरुआती दो कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने 7,810 करोड़ रुपए के शेयर नेट खरीदे हैं। 2 नवंबर को 4,458 करोड़ रुपए और 3 नवंबर को 3,352 करोड़ रुपए की खरीदारी हुई। विदेशी निवेशकों की वापसी से शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, इसे अभी विदेशी निवेशकों की स्थायी वापसी नहीं माना जा सकता। इसकी वजह यह है कि सितंबर और अक्टूबर में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाली थी।
दो महीने में निकाले 70 हजार करोड़ रुपए
नवंबर से पहले विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ था। सितंबर 2026 में FPI ने भारतीय शेयर बाजार से 35,861 करोड़ रुपए निकाले थे। अक्टूबर में भी बिकवाली जारी रही और विदेशी निवेशकों ने 34,843 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
इस तरह लगातार दो महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 70,704 करोड़ रुपए की नेट निकासी की। अब नवंबर में खरीदारी शुरू होने से बाजार को राहत मिली है।
दो दिनों में कितने शेयर खरीदे?
CDSL के आंकड़ों के मुताबिक, 2 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में 4,458 करोड़ रुपए की नेट खरीदारी की। इसमें स्टॉक एक्सचेंज से 4,319 करोड़ रुपए और प्राइमरी मार्केट से 139 करोड़ रुपए की खरीदारी शामिल थी।
वहीं, 3 नवंबर को उन्होंने 3,352 करोड़ रुपए के शेयर नेट खरीदे। इसमें स्टॉक एक्सचेंज के जरिए 3,271 करोड़ रुपए और प्राइमरी मार्केट के जरिए करीब 81 करोड़ रुपए की खरीदारी हुई।
इस तरह नवंबर के शुरुआती दो कारोबारी दिनों में कुल नेट खरीदारी 7,810 करोड़ रुपए रही। डॉलर में यह रकम करीब 82 करोड़ डॉलर है।

शेयर बाजार को कितना मिलेगा फायदा?
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से शेयर बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और बड़े शेयरों में मांग को सहारा मिल सकता है। 4 नवंबर को सुबह के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे पहले चार कारोबारी सत्रों में दोनों प्रमुख इंडेक्स करीब 5% चढ़ चुके थे।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से बाजार की धारणा को सहारा मिल सकता है। हालांकि, अमेरिकी चुनाव और वैश्विक बाजारों की चाल पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।
FPI और DII में क्या अंतर है?
FPI यानी Foreign Portfolio Investors ऐसे विदेशी निवेशक होते हैं, जो भारतीय शेयर, बॉन्ड और दूसरे वित्तीय साधनों में पैसा लगाते हैं। इनमें विदेशी फंड, पेंशन फंड और दूसरे संस्थागत निवेशक शामिल हो सकते हैं।
वहीं, DII यानी Domestic Institutional Investors भारतीय संस्थागत निवेशक होते हैं। इनमें घरेलू म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और बैंक शामिल हैं। बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी के साथ घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख भी शेयरों की कीमतों को प्रभावित करता है।
क्या विदेशी निवेशकों की वापसी जारी रहेगी?
नवंबर में खरीदारी के बावजूद पूरे साल का आंकड़ा अभी भी विदेशी निवेशकों की कमजोर दिलचस्पी दिखाता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर की खरीदारी के बाद भी 2026 में भारतीय शेयरों से विदेशी निवेशकों की कुल नेट निकासी करीब 30.59 अरब डॉलर बनी हुई थी।
इसलिए लगातार दो दिनों की खरीदारी को स्थायी वापसी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में अमेरिकी डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, ब्याज दरों के संकेत और कंपनियों के तिमाही नतीजे तय करेंगे कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में पैसा लगाना जारी रखते हैं या फिर बिकवाली की तरफ लौटते हैं।

