Gangajal Significance: सनातन धर्म में गंगाजल को केवल जल नहीं, बल्कि अमृत स्वरूप माना गया है. शास्त्रों के अनुसार गंगा नदी स्वयं भगवान विष्णु के चरणों से निकली और शिव जटाओं में विराजमान हुईं, इसलिए इसकी हर बूँद दिव्य और पवित्र है. मान्यता है कि घर में गंगाजल रखने से पाप नष्ट होते हैं, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का प्रवेश होता है.

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Gangajal Significance

Gangajal Significance

कब और कहां रखें गंगाजल? (Gangajal Significance)

धार्मिक परंपरा कहती है कि गंगाजल को घर लाने का सबसे शुभ समय प्रातःकाल या संध्या का होता है. इसे सदैव स्वच्छ पात्र में रखा जाना चाहिए. तांबे या चांदी के पात्र को श्रेष्ठ माना गया है. गंगाजल का स्थान घर का पूजाघर ही होना चाहिए. वहीं, इसे जल स्रोत या पीने के जल में थोड़ी मात्रा में मिलाने से घर का समस्त जल पवित्र और रोगनाशक माना जाता है.

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गंगाजल की पवित्रता पर मान्यता (Gangajal Significance)

अक्सर प्रश्न उठता है कि क्या गंगाजल में अन्य नदियों का जल मिलाने से इसकी पवित्रता और बढ़ जाती है? शास्त्रों और आचार्यों का स्पष्ट मत है कि गंगाजल स्वयं में इतना पवित्र है कि इसे किसी अन्य जल से मिलाने की आवश्यकता नहीं है. इसमें अक्षयत्व की शक्ति निहित है, यानी यह कभी नष्ट नहीं होता. यदि इसमें अन्य जल मिला दिया जाए तो उसकी विशिष्टता और ऊर्जा प्रभावित हो सकती है.

धार्मिक मान्यता (Gangajal Significance)

धर्मग्रंथों के अनुसार गंगाजल मात्र दर्शन, स्पर्श और आचमन से ही मनुष्य को पापमुक्त करने की क्षमता रखता है. यही कारण है कि मृत्यु के समय गंगाजल की कुछ बूँदें मुंह में डालना मोक्षदायक माना जाता है.

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