पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। पक्का घर हर गरीब का सपना होता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) इसी सपने को साकार करने के लिए शुरू की गई थी, ताकि देश के अंतिम व्यक्ति को भी सिर पर छत मिल सके। लेकिन जब इसी योजना की वजह से किसी वृद्ध को घर की टूटी दीवारों पर तिरपाल डालकर पति और बेटे के साथ रहने पर मजबूर होना पड़ जाए तो इससे बड़ी नाइंसाफी गरीबों के लिए और क्या हो सकती है।

बता दें कि जिले की उसरीपानी पंचायत की रहने वाली 68 वर्षीय हराबाई नायक ने पिछले साल प्रधानमंत्री आवास योजना की मंजूरी पाई थी। उसके नाम आवास सूची में दर्ज था, लेकिन निर्माण की पहली किश्त उनके खाते में नहीं आई। इस दौरान उन्हें घर की टूटी दीवारों पर तिरपाल डालकर पति और बेटे के साथ रहने पर मजबूर होना पड़ा। थक-हार कर हराबाई ने पीएम मोदी के नाम चिट्ठी लिखी। मीडिया में खबर आने के बाद जिम्मेदारों ने हराबाई से संपर्क किया और जल्द समाधान का आश्वासन दिया है। अब हराबाई को उम्मीद है कि जल्द ही रकम उनके खाते में आएगी।

सालभर जनपद कार्यालय का लगाया चक्कर, 4 बैंक में खुलवाया खाता

जानकारी के मुताबिक मंजूरी मिलने के बाद हराबाई ने चार अलग-अलग बैंकों में खाता खुलवाया और साल भर तक 20 बार जनपद कार्यालय का चक्कर लगाया। अधिकारियों ने ई-केवाईसी में तकनीकी खामियों का हवाला दिया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इस दौरान हराबाई की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई।

पीएम को लिखी चिट्ठी, उम्मीद जगी

थक-हार कर हराबाई ने अधिवक्ता कन्हैया मांझी की मदद से 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम चिट्ठी लिखी। चिट्ठी में उन्होंने अपने कठिन वित्तीय हालात का जिक्र करते हुए पीएमओ से मदद की गुहार लगाई। इस कदम के बाद हराबाई को उम्मीद जगी कि जल्द ही रकम उनके खाते में आएगी।

आवास निर्माण में रुकावट, बरसात का डर

मंजूरी मिलने के बाद हराबाई ने अपने कच्चे मकान का आधा हिस्सा तोड़ दिया था, क्योंकि बड़े बेटे के लिए आवास मिली थी और जगह कम पड़ रही थी। बाकी हिस्से में टूटे दीवारों पर तिरपाल डालकर पति गोविंद नायक और छोटे बेटे के साथ रह रही हैं। दो बेटों का विवाह हो चुका है और वे अलग रहते हैं। आवास नहीं मिलने के कारण छोटे बेटे का विवाह भी कराना संभव नहीं हो रहा।

पहली किश्त दो-तीन दिनों में खाते में आएगी

आवास योजना के ब्लॉक समन्वयक शिव कुमार नवरंगे ने बताया कि ई-केवाईसी की तकनीकी त्रुटियों को दूर करने के लिए ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक हर संभव प्रयास किए गए। अब फिंगर वेरिफिकेशन के बाद जनपद और जिला के माध्यम से टिकट नंबर जनरेट कर स्टेट कोऑर्डिनेटर को भेजा गया है। हराबाई का नाम ग्रीन लिस्ट में आ गया है और दो से तीन दिनों में आवास की पहली किश्त उनके खाते में जमा कर दी जाएगी।

हराबाई नायक की कहानी यह दिखाती है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही कैसे वर्षों तक इंतजार करने के बावजूद भी अपने हक के लिए लड़ते हैं और आखिरकार अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च स्तर तक आवाज उठा सकते हैं।

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