Rajasthan News: हाईकोर्ट ने कहा है कि रिश्वत केस में विश्वसनीय पुख्ता सबूत हो, भले ही शिकायतकर्ता व गवाह मामले में बयानों से पलटकर पक्षद्रोही हो गए हो तो भी वह प्रभावहीन ही माना जाएगा। हाईकोर्ट ने जेवीवीएनएल के सहायक अभियंता व उसके सहयोगी की रिश्वतखोरी के मामले में ट्रायल कोर्ट से मिली सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने यह आदेश पृथ्वीलाल मीणा व हेमराज की अपील को खारिज करते हुए दिया।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद वॉइस रिकॉर्डिंग में शिकायतकर्ताओं और आरोपी के बीच रिश्वत की मांग और राशि तय करने से जुड़ी बातचीत दर्ज थी। ऐसे में अभियोजन ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, ट्रैप कार्यवाही और बरामदगी के जरिए रिश्वत की मांग व मंजूरी को साबित किया है।
हाईकोर्ट ने माना कि सह आरोपी ने सहायक अभियंता के निर्देश पर रिश्वत की राशि स्वीकार की थी और वह केवल एक मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रहा था। ऐसे में मध्यस्थ के जरिए रिश्वत लेना भी अपराध है।
अपील में अभियुक्तों ने कहा कि ट्रायल के दौरान शिकायतकर्ता अपने पूर्व बयानों से मुकर गए और उन्होंने अभियोजन का समर्थन नहीं किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ शिकायतकर्ताओं के बयानों से मुकरने से अभियोजन का पूरा मामला खुद ही खत्म नहीं हो जाता।
पढ़ें ये खबरें
- मरवाही वनमंडल में 14.77 लाख के घोटाले का खुलासा, आरोपी कैम्पा शाखा प्रभारी भूपेंद्र साहू को किया गया सस्पेंड
- फिरोजपुर में बॉर्डर पार ड्रग तस्करी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 28 किलो हेरोइन और ड्रग मनी बरामद
- पूजा के बहाने देवी मां से मांगी माफी, फिर 1 किलो चांदी का मुकुट लेकर हुआ नौ दो ग्यारह, पूरी भक्ति CCTV में हुई कैद
- पंजाब में 26 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित, नगर निकाय चुनाव के लिए मान सरकार का बड़ा फैसला
- कंधमाल में मनरेगा घोटाला: 38 लाख रुपये की हेराफेरी का आरोप, ADO और PEO निलंबित

