गयाजी। दीपावली और छठ पर्व के दौरान आग लगने की संभावित घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गया जिला अग्निशमन विभाग ने कमर कस ली है। जिले भर में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जिला अग्निशमन पदाधिकारी ज्योति प्रकाश ने एक प्रेस वार्ता के दौरान विभाग की विस्तृत तैयारियों की जानकारी साझा की।
पिछले दस वर्षों में जिले में हुई आगजनी की घटनाओं के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने के बाद संवेदनशील और जोखिम भरे स्थानों की पहचान की गई है। त्योहारों के दौरान शहर में उमड़ने वाली भारी भीड़ और आवागमन की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को त्रि-स्तरीय (L1, L2 और L3) ढांचे में बांटा गया है, जिससे हर क्षेत्र पर पैनी नजर रखी जा सके।
सुरक्षा का त्रि-स्तरीय ढांचा और वाहनों की तैनाती
अग्निशमन विभाग ने अपनी कार्ययोजना को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है:
- L1 स्तर (सर्वाधिक संवेदनशील): इसमें जिले के 10 सबसे अधिक संवेदनशील स्थानों को रखा गया है। इन महत्वपूर्ण जगहों पर दमकल की गाड़ियां पहले से ही तैनात रहेंगी ताकि आसपास आग लगने की सूचना मिलते ही उन्हें तुरंत रवाना किया जा सके।
- L2 स्तर (मध्यम संवेदनशील): इस श्रेणी में 6 स्थानों को शामिल किया गया है, जहां आग लगने का जोखिम L1 की तुलना में थोड़ा कम है। यहां तैनात वाहन अपने आसपास के इलाकों में सेवाएं देंगे।
- L3 स्तर (भ्रमणशील निगरानी): इसमें 5 स्थानों को रखा गया है, जहां अग्निशमन वाहन लगातार गश्त (भ्रमणशील) करते रहेंगे और आसपास के क्षेत्रों पर अपनी नजर बनाए रखेंगे।
इस प्रकार, कुल 21 संवेदनशील स्थानों पर विभिन्न स्तरों पर दमकल वाहनों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा, पूरे गया जिले में कुल 33 अग्निशमन वाहन उपलब्ध हैं, जिन्हें अनुमंडलों की जरूरत और संवेदनशीलता के आधार पर बांटा गया है। उदाहरण के लिए, बोधगया में 5 और शेरघाटी में लगभग 8 अग्निशमन वाहन तैनात किए गए हैं।
गांधी मैदान से रेलवे स्टेशन तक 6 अस्थायी नियंत्रण कक्ष
त्योहारों के सीजन में शहर के व्यस्त इलाकों में भीड़भाड़ को नियंत्रित करने और आपातकालीन सूचनाओं का आदान-प्रदान सुगम बनाने के लिए छह प्रमुख स्थानों पर अस्थायी नियंत्रण कक्ष बनाए जा रहे हैं। इनमें गांधी मैदान (जहां पटाखों की बड़ी बाजार लगती है), कालचक्र मैदान और गया रेलवे स्टेशन जैसे अत्यधिक आवाजाही वाले क्षेत्र शामिल हैं।
ये अस्थायी कंट्रोल रूम स्थानीय स्तर पर तैनात कर्मियों के लिए मुख्य संपर्क केंद्र के रूप में काम करेंगे। आग लगने की किसी भी घटना की सूचना सबसे पहले स्थानीय नियंत्रण कक्ष को दी जाएगी, जो तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष को अवगत कराएगा। जिला नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय रहेगा और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दमकल वाहन व बचाव दल को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना करेगा।
संकरी गलियों के लिए विशेष फायर बाइक
गया शहर की तंग गलियों और घनी आबादी वाले मोहल्लों में बड़ी दमकल गाड़ियों के प्रवेश में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विभाग ने विशेष रूप से दो फायर बाइक तैनात की हैं। प्रत्येक बाइक पर दो प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मी तैनात रहेंगे। इन बाइकों पर 10 से 12 लीटर क्षमता वाले CO2 और पानी आधारित छोटे अग्निशमन उपकरण लगाए गए हैं।
ये फायर बाइक ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाएंगी। किसी संकरी गली में आग लगने की सूचना मिलने पर ये गाड़ियां सबसे पहले मौके पर पहुंच कर प्रारंभिक स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास करेंगी, जिससे छोटी घटना को विकराल रूप लेने से समय रहते रोका जा सके। इसके बाद आवश्यकतानुसार बड़ी गाड़ियों को बुलाया जाएगा।
क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और जन-जागरूकता अभियान
हर अग्निशमन उपकेंद्र में प्रशिक्षित कर्मियों की एक क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) भी तैनात की गई है, जो आग बुझाने के साथ-साथ राहत और बचाव कार्यों को अंजाम देने में पूरी तरह सक्षम है। इसके अतिरिक्त, पटाखा बिक्री की दुकानों की लगातार जांच की जा रही है और दुकानदारों को अग्नि सुरक्षा के मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान चलाकर आम नागरिकों को आपात स्थिति से निपटने के गुर सिखाए जा रहे हैं।
विभाग ने आम जनता से अपील की है कि दीपावली पर सुरक्षित स्थानों पर ही पटाखे जलाएं, बच्चों पर कड़ी नजर रखें तथा घरों में पानी और बालू की बाल्टी जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं जरूर रखें। किसी भी अप्रिय घटना की सूचना तुरंत अग्निशमन विभाग को दें ताकि जान-माल की सुरक्षित रक्षा की जा सके।

