गयाजी। जिले में 6 सितंबर से 21 सितंबर तक चलने वाला पितृपक्ष मेला इस बार विवादों में घिर गया है। परंपरागत रूप से यह मेला पितरों की मोक्ष कामना के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म का सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु विष्णुपद मंदिर आकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं।
हालांकि इस बार विवाद की वजह है ऑनलाइन पिंडदान। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग ने ऑनलाइन पिंडदान पैकेज जारी किया है, जिसके तहत लोग विभाग की वेबसाइट पर बुकिंग कर घर बैठे ही अपने पितरों का पिंडदान करवा सकते हैं। पिछले तीन वर्षों से यह सेवा जारी है, लेकिन इस बार पंडा समाज ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है।
पंडा समाज का तर्क
विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल, सदस्य मणी लाल बारिक और पंडा समाज के वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि धार्मिक ग्रंथों में ऑनलाइन पिंडदान का कोई प्रमाण नहीं है। उनका कहना है कि पिंडदान स्वयं परिजन के हाथों से करने का विधान है। यदि कोई दूसरा व्यक्ति पैसे लेकर यह कर्म करे, तो यह शास्त्रसम्मत नहीं है।
‘मोक्ष की प्राप्ति केवल सशरीर उपस्थित होकर संभव’
गयापाल पंडा का कहना है कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए परिजनों को स्वयं गया आना जरूरी है। उनका मानना है कि ई-पिंडदान से पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी और यह केवल श्रद्धालुओं को भ्रमित करने का तरीका है।
परंपरा और आस्था से खिलवाड़
पंडा समाज का कहना है कि अगर केवल ऑनलाइन पूजा से मोक्ष मिल सकता, तो अनिल अंबानी, संजय दत्त, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने क्यों खुद यहां आकर पिंडदान किया। उनका मानना है कि ई-पिंडदान सनातन धर्म की परंपरा और आस्था से खिलवाड़ है। कुछ पंडा यहां तक कह रहे हैं कि अगर सरकार में हिम्मत है तो फिर मक्का जाने वाले लोगों को भी ऑनलाइन दर्शन करवा दे। इस विवाद के बीच एक ओर श्रद्धालु ऑनलाइन सुविधा को आधुनिक समय के हिसाब से आसान विकल्प मान रहे हैं, तो दूसरी ओर पंडा समाज इसे धर्मविरोधी और आस्था पर चोट करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।