इमरान खान, खंडवा। सिंध नदी पार से आई सिंधी घीयर मिठाई भारत में रिश्तों में मिठास घोल रही है। मध्यप्रदेश के खंडवा सिंधी कॉलोनी में होली के सप्ताह भर पहले से दुकानों पर लोगों की भीड़ मिठाई खरीददारी के लिए उमड़ रही है। सिंधी समाज के बीच कई दशकों से इस मिठाई का स्वाद लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। सिंधी समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी अब इस मिठाई की खुशबू और इसके स्वाद को भी जानने लगे हैं।

पाकिस्तान से भारत आया परिवार कर रहा निर्वहन

खंडवा सिंधी बाजार में इस खास घीयर मिठाई को क्विंटल में खरीदने वाले व्यापारी अनिल आरतानी ने बताया की देश विभाजन के समय सिंधी समाज के लोग जब पाकिस्तान से भारत आए थे। तब मिठाई की परंपरा सिंधी घीयर भी उनके साथ भारत आई। परंपराएं, मान्यताएं हर पीढ़ियों में बदलती चली गई, टूटती गई लेकिन होली के त्योहार पर इस मिठाई का विशेष महत्व है, वह कई दशकों बाद भी आज विद्यमान है। पाकिस्तान से भारत आए सिंधी परिवार ने इसका निर्वहन बखूबी किया। तभी यह कई पीढियां में रचा और बसा हुआ है।

आखिर यह पकवान बनता कैसे

इस घीयर की इतनी डिमांड है कि रोज 15 क्विंटल घियर की खपत इन दिनों हो रही है। जिसे बनाने के लिए अलग-अलग कारीगर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खंडवा के हीरा स्वीट्स पर पिछले 46 वर्षों से ये मिठाई खरीदने दूर दूर से लोग आते है। आखिरकार यह पकवान कैसे बनता है यह सवाल सबकी जुबान पर है। कारीगरों ने बताया की जलेबी की तरह दिखने वाली इस मिठाई को तैयार करने के लिए मैदा, दूध और केसर का घोल बनाकर दो दिनों तक खटास आने तक रख दी जाती है। दो दिनों बाद शुद्ध घी में इसे छाना जाता है। हर दुकानदार द्वारा बनाने के तरीके अलग-अलग है लेकिन स्वाद सब में एक ही है।

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सभी मिठाइयों की मिठास एक जैसी

इस मिठाई की खासियत यह है कि यह एक बार तैयार हो जाने के बाद 15 दिनों से ज्यादा समय तक खराब नहीं होती। शुद्ध घी से बनने के कारण इसे लोग अपने रिश्तेदारों को गिफ्ट के तौर पर देने के लिए लंबे समय तक बचा के रखते हैं ताकि रिश्तों की मर्यादा भी बनी रहे। शुद्ध घी से बनने वाली इस मिठाई के लिए लोगों को जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ती है। तेल या डालडा में बनी मिठाई के लिए कम मूल्य चुकाना पड़ता है। लेकिन सभी मिठाइयों की मिठास एक जैसी होती है।

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