Gold-Silver Prices Crash: शुक्रवार, 9 जनवरी को सोने और चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट दर्ज की गई. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और सेफ-हेवन एसेट्स की मांग में हल्की कमी के चलते घरेलू बुलियन मार्केट पर दबाव देखने को मिला. हालांकि चांदी की गिरावट, सोने के मुकाबले सीमित रही.

बाजार के आंकड़ों के अनुसार, भारत में सोना करीब ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा, जबकि चांदी की कीमत लगभग ₹2.42 लाख प्रति किलो रही. हाल के दिनों में गोल्ड प्राइस ट्रेंड मजबूत रहने के कारण यह गिरावट निवेशकों के लिए चौंकाने वाली रही.

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Gold-Silver Prices Crash
Gold-Silver Prices Crash

एक्सपर्ट्स की राय क्या कहती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह कमजोरी किसी बड़े ट्रेंड रिवर्सल का संकेत नहीं है. हालिया तेजी के बाद इसे सामान्य मार्केट कंसोलिडेशन माना जा रहा है. प्रेशियस मेटल्स मार्केट में इस तरह की हलचल को शॉर्ट टर्म करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

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आज कीमतों में गिरावट क्यों आई?

कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, करेंसी में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल मार्केट संकेतों ने सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित किया. डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से उभरते बाजारों में गोल्ड निवेश पर दबाव बना.

इसके अलावा, इंटरनेशनल मार्केट में किसी बड़े नए ट्रिगर की कमी के चलते निवेशक सतर्क नजर आए, जिससे बुलियन ट्रेडिंग में सुस्ती देखने को मिली.

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LKP सिक्योरिटीज के वीपी (रिसर्च – कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के अनुसार, MCX गोल्ड में कमजोरी दर्ज की गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहे.

उन्होंने बताया कि भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव ने घरेलू बाजार में सोने और चांदी पर अतिरिक्त दबाव डाला. आने वाले हफ्तों में ADP एम्प्लॉयमेंट डेटा और US नॉन-फार्म पेरोल जैसे अहम आंकड़े जारी होंगे, जो ब्याज दरों और डॉलर की दिशा तय कर सकते हैं.

त्रिवेदी के मुताबिक, निकट भविष्य में सोना ₹1.35 लाख से ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है. यानी फिलहाल बाजार में रेंज-बाउंड मूवमेंट की संभावना है.

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चांदी में मजबूती क्यों बनी हुई है?

जहां सोने में हल्की नरमी दिखी है, वहीं चांदी के फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत माने जा रहे हैं. टाटा म्यूचुअल फंड की जनवरी 2026 आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, चांदी साल 2025 की बेस्ट परफॉर्मिंग कमोडिटी रही, जिसने करीब 161 प्रतिशत का रिटर्न दिया.

इस तेजी के पीछे सप्लाई की कमी, मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड और निवेशकों की बढ़ती रुचि को बड़ी वजह माना गया है. इसके अलावा माइनिंग सप्लाई में गिरावट, चीन की एक्सपोर्ट पाबंदियां, कम इन्वेंट्री और सिल्वर ETF में निवेश ने भी लंबी अवधि के नजरिये को सपोर्ट किया है.

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लॉन्ग टर्म आउटलुक क्या कहता है?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट टर्म गिरावट के बावजूद सोने और चांदी का लॉन्ग टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है. रिद्धि सिद्धि बुलियन के मैनेजिंग डायरेक्टर और IBJA के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, दोनों ही धातुएं स्ट्रक्चरली मजबूत हैं.

उनका कहना है कि सोना पोर्टफोलियो को स्थिरता देता रहेगा, जबकि चांदी में ज्यादा उतार-चढ़ाव के चलते बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है. तेज रैली के बाद बीच-बीच में कंसोलिडेशन आना स्वाभाविक है और इससे ओवरऑल ट्रेंड नहीं बदलता.

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कोठारी के मुताबिक, अगले साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत $5,000 से $5,500 प्रति औंस तक जा सकती है. भारत में सोना ₹1.50 लाख से ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है, जिसे ब्याज दरों में कटौती और सेंट्रल बैंक की खरीदारी का सपोर्ट मिलेगा.

वहीं चांदी की कीमत $95 से $100 प्रति औंस तक जा सकती है. भारत में चांदी ₹3.00 लाख से ₹3.25 लाख प्रति किलो तक पहुंचने का अनुमान है. हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस दौरान 10 से 15 प्रतिशत तक का शॉर्ट टर्म करेक्शन संभव है, जिसे हेल्दी मार्केट करेक्शन माना जाना चाहिए.

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