कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल गूगल को एक भ्रामक विज्ञापन दिखाना इतना महंगा पड़ेगा, शायद इसकी कल्पना भी नहीं की होगी। मामला एक किलो अखरोट की खरीदी पर 87 प्रतिशत छूट के विज्ञापन से जुड़ा है। विज्ञापन देखकर उपभोक्ता ने ऑनलाइन खरीदारी की, लेकिन न सामान मिला और न ही शिकायत पर कोई संतोषजनक जवाब। आखिरकार उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया गया और आयोग ने ऐसा आदेश सुनाया कि मूल रकम के मुकाबले करीब 81 गुना राशि का जुर्माना अब भरना होगा। यानी प्रतिशत में देखें तो करीब 8 हजार फीसदी। अब सवाल है कि आखिर एक मामूली ऑनलाइन खरीदारी के मामले में गूगल को इतनी बड़ी कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है और भ्रामक विज्ञापन दिखाने को लेकर आयोग ने क्या टिप्पणी की।
दरअसल, मामला ग्वालियर के बृजमोहन महाजन से जुड़ा है। 3 अक्टूबर 2023 को महाजन गूगल नेटवर्क पर समाचार देख रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक ऑनलाइन विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में एक किलो अखरोट की खरीदी पर 87 प्रतिशत छूट देने का दावा किया गया था। हैप्पी अवर्स-6 दिवाली सेल ऑनलाइन नाम की वेबसाइट पर सीमित समय के लिए यह ऑफर उपलब्ध होने की बात कही गई थी। आकर्षक छूट देखकर ब्रजमोहन महाजन ने ऑनलाइन खरीदारी कर भुगतान कर दिया।
पेमेंट के बाद नहीं हुई डिलीवरी
भुगतान के बाद न तो अखरोट की डिलीवरी हुई और न ही विक्रेता की ओर से कोई जानकारी दी गई। काफी इंतजार के बाद भी जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो महाजन ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। जिसमें उन्होंने गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत अधिकारी को पक्षकार बनाया। साथ ही विज्ञापन के जरिए खरीदारी के लिए प्रेरित किए जाने और भुगतान के बाद सामान नहीं मिलने की बात उठाई।
खरीदारी के लिए किया आकर्षित
परिवादी महाजन ने आयोग के सामने अपने दावे के समर्थन में शपथपत्र और दस्तावेज पेश किए। सुनवाई के दौरान आयोग ने विज्ञापन में दिए गए ऑफर और उपभोक्ता की शिकायत पर विचार किया। आयोग ने पाया कि एक किलो अखरोट की खरीदी पर 87 प्रतिशत छूट का दावा कर महज 260 रुपये में सामान देने का विज्ञापन उपभोक्ता को खरीदारी के लिए आकर्षित करने वाला था। वहीं भुगतान के बाद सामान नहीं मिलने से उपभोक्ता को परेशानी का सामना करना पड़ा।
45 दिन के अंदर ब्याज के साथ पैसा लौटाने का आदेश
आयोग ने यह भी गौर किया कि शिकायत के बाद गूगल की ओर से विज्ञापनदाता के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी नहीं दी जा सकी। आयोग के मुताबिक, विज्ञापन को लेकर शिकायत के बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं करना सेवा में कमी के दायरे में आता है। इसी आधार पर आयोग ने गूगल को उपभोक्ता के पक्ष में आदेश जारी किया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने फैसला सुनाते हुए गूगल को 45 दिन के भीतर कुल 21 हजार 260 रुपये देने के आदेश दिए। इसमें उपभोक्ता की मूल रकम वापस करने के साथ मानसिक परेशानी और प्रकरण व्यय के लिए मुआवजा भी शामिल है। निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं होने पर आदेश की तारीख से भुगतान तक पूरी रकम पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
उपभोक्ता आयोग ने दी ये सलाह
इस मामले में आयोग ने उपभोक्ताओं को भी बेहद आकर्षक छूट वाले विज्ञापनों से प्रभावित होकर खरीदारी करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी। वहीं डिजिटल मंचों पर विज्ञापन दिखाने और उपभोक्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी को लेकर भी यह फैसला महत्वपूर्ण है। क्योंकि ऑनलाइन खरीदारी में उपभोक्ता और विक्रेता के बीच भरोसे की एक अहम कड़ी विज्ञापन भी होते हैं। ऐसे में भ्रामक ऑफर के जरिए उपभोक्ता को नुकसान पहुंचने पर जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी इस मामले के केंद्र में रहा।

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