पटना। बिहार में ग्राम कचहरी न्याय मित्रों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर गर्दनीबाग धरना स्थल पर तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। संघ की प्रमुख मांग है कि उनका मासिक मानदेय 7,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। न्याय मित्रों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन और आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होंगे।
2007 से कार्यरत न्याय मित्रों का दर्द
राज्य अध्यक्ष रामाशंकर राय और नवल किशोर प्रसाद ने बताया कि सभी न्याय मित्र वर्ष 2007 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2015 में उनका मानदेय बढ़ाकर 7,000 रुपये किया गया था, जिसके बाद से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। न्याय मित्रों का कहना है कि वे विधि स्नातक (लॉ ग्रेजुएट) हैं और 50 से 60 किलोमीटर दूर जाकर कार्य करते हैं। मौजूदा मंहगाई में इस अल्प मानदेय से उनका पेट्रोल खर्च निकलना भी मुश्किल हो गया है।
खोखले आश्वासनों से नाराजगी
न्याय मित्रों का आरोप है कि पंचायती राज विभाग के सचिव द्वारा 1 जुलाई 2025 से मानदेय बढ़ाने का पत्र जारी किया गया था, लेकिन धरातल पर अब तक कुछ नहीं हुआ। डॉ. उदय नारायण प्रसाद और प्रभात कुमार सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि वे आम जनता को न्याय दिलाने का काम करते हैं, लेकिन सरकार खुद उनके साथ अन्याय कर रही है। संविदा कर्मियों को मिलने वाली अन्य सुविधाएं भी उन्हें नहीं मिल रही हैं।
सरकार को सख्त चेतावनी
न्याय मित्रों ने मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप कर उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की अपील की है। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले लेगा।

