सितंबर में अधिकांश दिनों तक दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता अपेक्षाकृत ठीक रहने के बाद अब हवा फिर खराब होने की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। बुधवार को दिल्ली-NCR की एयर क्वालिटी ‘मॉडरेट’ यानी सामान्य श्रेणी में पहुंच गई। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सरकार ने इससे निपटने के लिए एहतियाती कदम लागू करने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली-NCR में 1 अक्टूबर से संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू हो गया है। इसके तहत प्रदूषण के स्तर के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय स्थिति बिगड़ने से पहले ही जरूरी पाबंदियां और नियंत्रण उपाय लागू किए जा सकेंगे। GRAP में किए गए बदलावों को सोमवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की बैठक में मंजूरी दी गई थी। इसके बाद मंगलवार को इन बदलावों की घोषणा की गई।

प्रदूषण बढ़ने से पहले लगेंगी पाबंदियां

संशोधित GRAP के तहत अधिकारियों को पाबंदियां लागू करने के लिए वायु गुणवत्ता के खराब स्तर तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नए प्रावधानों के तहत प्रदूषण की संभावित स्थिति को देखते हुए पहले से ही जरूरी नियंत्रण उपाय लागू किए जा सकेंगे। संशोधित GRAP के तहत 1 अक्टूबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक दिल्ली-NCR में प्रदूषण से जुड़ी कई गतिविधियों पर पाबंदियां लागू रहेंगी। इसका उद्देश्य सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने से पहले ही रोकथाम के उपाय शुरू करना है। इसके अलावा मौसम के पूर्वानुमान और संभावित वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए नियमों और पाबंदियों में आवश्यक बदलाव भी किए जा सकते हैं।

अलग-अलग चरणों में लागू किए जाएंगे GRAP के उपाय

संशोधित GRAP के तहत प्रदूषण नियंत्रण के उपाय 1 अक्टूबर और 1 नवंबर से अलग-अलग चरणों में लागू किए जाएंगे। GRAP के प्रावधानों के साथ दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान भी समानांतर रूप से लागू रहेगा। 1 अक्टूबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी कई गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू रहेंगे। वहीं, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 के बीच स्थिति के अनुसार अधिक सख्त पाबंदियां लागू की जा सकती हैं।

बिना वैलिड PUC वाहनों को नहीं मिलेगा ईंधन

1 अक्टूबर से दिल्ली-NCR में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना चलने वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल या CNG नहीं दिया जाएगा। ईंधन केंद्रों पर वाहनों के PUC की जांच की जाएगी। इसके लिए कई स्थानों पर ऑटोमैटिक सिस्टम और अलर्ट की व्यवस्था की जा रही है, जिससे बिना वैध प्रमाणपत्र वाले वाहनों की पहचान की जा सके। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों का चालान भी किया जा सकता है। इसके अलावा धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण स्थलों पर भी विभिन्न एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं। प्रदूषण की स्थिति के दौरान डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू रहेंगे।

BS-IV गाड़ियों के घुसने पर रोक

संशोधित GRAP के तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक BS-IV मानक वाले वाहनों के दिल्ली-NCR में प्रवेश पर रोक रहेगी। इस अवधि में केवल BS-VI, इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य सर्दियों के दौरान वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना है। नए नियमों में आने वाले वर्षों में वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी बदलाव किए गए हैं। 1 जुलाई 2027 से दिल्ली-NCR में 3,500 किलोग्राम से कम वजन वाले वाहनों का नया रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए किया जाएगा। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और नोएडा में यह व्यवस्था 1 जुलाई 2028 से लागू होगी, जबकि NCR के बाकी क्षेत्रों में 1 जनवरी 2029 से यह नियम प्रभावी होगा। दिल्ली में ऑटो-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी बदलाव किया गया है। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो का नया रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ई-कॉमर्स से जुड़े वाहनों को लेकर भी नियमों में बदलाव किए गए हैं।

क्या होता है GRAP?

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) वायु प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में उसे नियंत्रित करने के लिए लागू किए जाने वाले आपातकालीन उपायों की व्यवस्था है। इसके तहत वायु गुणवत्ता के स्तर के आधार पर अलग-अलग चरणों में पाबंदियां और नियंत्रण उपाय लागू किए जाते हैं।

GRAP-1: AQI 201 से 300 के बीच होने पर लागू होता है।

GRAP-2: AQI 301 से 400 के बीच होने पर लागू होता है।

GRAP-3: AQI 401 से 450 के बीच पहुंचने पर लागू होता है।

GRAP-4: AQI 450 से ऊपर होने पर लागू होता है।

इन चरणों के तहत प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग प्रतिबंध और नियंत्रण उपाय लागू किए जाते हैं।

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