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सोशल मीडिया पर GST कम होने का क्रेडिट मिला राहुल गांधी को

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नई दिल्ली. कल तक जो बीजेपी सरकार ज़ोरदार तरीके से जीएसटी की दरों को सही बता रही है. उसे गुजरात चुनाव से ठीक पहले वापिस लेना पड़ा. जीएसटी में 28 फीसदी टैक्स के प्रबल समर्थक वित्तमंत्री अरुण जेटली इस बात का जवाब नहीं दे पाए कि क्यों चुनाव से पहले टैक्स घटाना पड़ा. नई दरों के हिसाब से अब केवल 50 वस्तुओं पर ही 28 फीसदी की दर से कर लगेगा.

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बीजेपी के दिल्ली के अंदरुनी सूत्र बताते हैं कि गुजरात में जीएसटी की वजह से बीजेपी की नुकसान होने की रिपोर्ट लगातार मिल रही थी. चूंकि गुजरात में बड़ा व्यापारी वर्ग है जो जीएसटी के चलते बीजेपी से नाराज़ था. ये पार्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय था.

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी की इस चिंता  को और बढ़ा दिया था. अपनी गुजरात की हर सभा में वे जीएसटी को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं. जिससे राहुल की स्वीकार्यता मोदी की राज्य में बहुत तेज़ी से बढ़ रही थी. इन तमाम बातों के मद्देनज़र सरकार के पास दरों को कम करने के अलावा कोई चारा नहीं था.

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लेकिन सरकार ने जैसे ही जीएसटी की दर घटाई. राहुल गांधी को जीएसटी कम करने का क्रेडिट देने वाला हैश टैग टॉप ट्रेंड करने लगा. दो दिन से ये हैशटैग टॉप ट्रेंड में शामिल रहा. सरकार का जीएसटी काउंसिल #GSTCouncil  हैशटैग इसके मुकाबले कमज़ोर साबित हुआ.

सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को जीएसटी कम कराने का श्रेय देने की होड़ मच गई. पत्रकार से आम आदमी पार्टी के नेता बने आशुतोष ने कांग्रेस को जीएसटी का क्रेडिट ना देने पर तंज कसा है. आशुतोष ने लिखा है कि जब हार का खतरा मंडराया तो बीजेपी को आम आदमी याद आया.

रवि मदूम ने लिखा है कि-

कांग्रेस के लीडर्स सहित तमाम लोग राहुल गांधी को जीएसटी कम कराने का क्रेडिट दे रहे हैं. जिस वक्त जीएसटी कम हुआ राहुल गांधी के ट्विटर एकाउंट से पिन ट्विट कर दिया कि कांग्रेस ने देश की जनता के साथ मिलकर कई वस्तुओं पर 28% टैक्स कम कराया है. इस ट्विट में उन्होंने 18% अधिकतम जीएसटी दर रखे जाने की मांग की.

 

 

इस पर राहुल गांधी का बयान भी आया. जिसमें उन्होंने कहा कि जीएसटी को फिर से गब्बर सिंह टैक्स बताते हुए उसमें बदलाव के सुझाव दिए. राहुल गांधी ने कहा, “बीजेपी के जीएसटी को हम गब्बर सिंह टैक्स कहते हैं। हम चाहते हैं उसमें स्ट्रक्चरल बदलाव आए। फंडामेंटल चेंज आए। अच्छी बात है कि कई आइटम्स को 28% स्लैब से निकाला है। हम चाहते हैं कि सिंपल टैक्स हो। एक टैक्स रेट हो।”

 जीएसटी पर राहुल ने शुक्रवार को ट्वीट कर 3 सुझाव दिए थे
1. “जीएसटी आर्किटेक्चर में फंडामेंटल सुधार किया जाए ताकि देश को एक सिंपल टैक्स मिल सके।”
2. “बयानबाजी कर देश का वक्त बर्बाद न करें।”
3. “अपनी नाकाबिलियत मानें, घमंड को दूर करें और भारत के लोगों की बात सुनें।”
इसके बाद राहुल गांधी ने शनिवार को मां अंबा के दर्शन करने के बाद चौथे चरण का प्रचार शुरु किया. जिससे फिर राहुल गांधी का माहौल बन गया. जानकार भी बताते हैं कि राहुल गांधी ने इस मुद्दे को सही जगह पर सही वक्त में उठाया है और कैश कराया है. लिहाज़ा बीजेपी को इस मुद्दे पर बैकफुट पर लाने का श्रेय राहुल गांधी को मिलना चाहिए.
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 2014 में भू-अधिग्रहण कानून के खिलाफ मोर्चा खोलकर बीजेपी को ये बिल वापस लेने पर मजबूर कर दिया था.
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