कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में डॉ. भीमराव अंबेडकर के कथित चित्र जलाने के मामले में हाईकोर्ट की DB बेंच में अहम सुनवाई हुई। हाइकोर्ट में सुबह 10 बजे से शुरू हुई सुनवाई शाम 05 बजे तक जारी रही। इस दौरान शासन ने अपना पक्ष रखा। वहीं आरोपी पक्ष के वकीलों ने भी पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और नियमों को ताक पर रखने सहित अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए अपना पक्ष रखा।हाइकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला रिजर्व किया है। संभावना है कि कल हाई कोर्ट का फैसला सामने आ सकता है।
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दरअसल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा सहित 4 लोगों को पुलिस ने FIR के चलते बीते गुरुवार को गिरफ्तार किया था। बाबा साहब अम्बेडकर का पुतला जलाने के आरोप में स्थाई वारंटी मकरन्द बौध्द द्वारा FIR दर्ज कराई गई थी। जिसे हाइकोर्ट में एड अनिल मिश्रा की ओर से याचिका दायर कर चैलेंज किया गया। शनिवार ,रविवार को स्पेशल बेंच द्वारा हुई सुनवाई में शासन ने जवाब पेश करने समय मांगा था। जिसके चलते आज हाइकोर्ट की डिविजन बेंच ने सुबह 10 बजे से शाम 05 बजे तक मामले में मैराथन सुनवाई करने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया है, संभावना है कि हाईकोर्ट कल फैसला सुना सकता है।
एड अनिल मिश्रा के वकील और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन पाठक ने बताया कि राज्य शासन ने आज दर्ज की गई FIR और हाइकोर्ट द्वारा मांगी गई जानकारी का जवाब पेश किया। वहीं वकील अनिल मिश्रा की ओर से भी कोर्ट मे बताया गया कि पुलिस ने गलत तरीके से FIR दर्ज की। पुलिस ने विधि प्रक्रिया का पालन नहीं किया,पहले गिरफ्तार किया,बाद में FIR दर्ज की गई। परिवार को भी समय पर सूचना नहीं दी गयी। एट्रोसिटी एक्ट सहित लगाई अन्य धाराओं में नोटिस देकर छोड़ने का प्रावधान है। ग्वालियर पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए नोटिस देकर भी नही छोड़ा। हैरानी इस बात की भी रही कि पुलिस ने जिस फरियादी की शिकायत पर FIR दर्ज की। वह खुद स्थाई वारंटी है। पुलिस को उसके थाने पहुंचने पर पूर्व में दर्ज FIR मामले में उसे तत्काल गिरफ्तार करना चाहिए। लेकिन पुलिस ने ऐसा नही किया। जब रविवार को हाइकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले पर सवाल उठाए तो आधा घण्टे के अंदर मकरंद बौध्द को गिरफ्तार कर लिया गया। ये पुलिस की नियत और कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है।
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एडवोकेट पवन पाठक का कहना है कि सभी तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। आपको बता दे कि वकील अनिल मिश्रा समेत 7 लोगों पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के कथित चित्र को जलाने और अपमानजनक नारे लगाने का आरोप है। एडवोकेट अनिल मिश्रा समेत सात लोगों के खिलाफ साइबर सेल थाने में गुरुवार को एफआईआर दर्ज की गई थी। गुरुवार को ही एड अनिल मिश्रा,अमित दुबे,मोहित ऋषीश्वर,गौरव व्यास को गिरफ्तार किया था।
शुक्रवार को जिला न्यायालय की JMFC मधुलिका खत्री की कोर्ट ने दायर की गई जमानत याचिका को खारिज किया था,जिसके चलते शुक्रवार को चारों को जेल भेज दिया गया था। वहीं इस मामले में कुलदीप कांकोरिया,अमित भदौरिया,ध्यानेन्द्र शर्मा फरार चल रहे है।बहरहाल देखना होगा कि हाईकोर्ट इस मामले में अपना क्या फैसला सुनाती है।
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