कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। EXCLUSIVE: गांधी जयंती पर आज पूरे देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों और उनके विचारों की बातें हों रही है, लेकिन ग्वालियर में बापू की बदहाली की ये तस्वीरें व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। ये तस्वीरें जयारोग्य अस्पताल की हैं, जहां महात्मा गांधी की प्रतिमा सालों से ताले के पीछे बंद है। जिस जगह से कभी मरीजों को इलाज और सेवा मिलती थी, वही परिसर अब बदहाली और अनदेखी की तस्वीर दिखा रहा है। बापू की प्रतिमा पर मकड़जाल की माला है, प्रतिमा तक पहुंचने वाला रास्ता कचरे से भरा है और आसपास का पूरा परिसर बदहाल नजर आ रहा है।
दो अक्टूबर के मौके पर गांधी जी के आदर्शों पर बड़े-बड़े भाषण हो रहे है, लेकिन ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल की पुरानी पत्थर वाली बिल्डिंग की हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा एक बंद हॉल में कैद है। प्रतिमा के आसपास गंदगी और कचरा नजर आ रहा है। शराब की बोतल पड़ी हुई है, दरवाजे पर ताला लगा है और लंबे समय से इस हिस्से की सुध नहीं ली गई। यानी जिस महात्मा गांधी ने स्वच्छता और सेवा को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाया, उन्हीं की प्रतिमा आज बदहाल व्यवस्था और अनदेखी के बीच ताले में बंद है।
बापू की प्रतिमा की बदहाली
- सालों से ताले के पीछे बंद प्रतिमा
- आसपास गंदगी और कचरा, शराब की बोतल
- प्रतिमा पर मकड़जाल की माला, परिसर बदहाल
- घोर अंधेरा, धूल की चादर
सिंधिया राजवंश ने कराया था भवन का निर्माण
खास बात ये है कि जयारोग्य अस्पताल की इस पुरानी बिल्डिंग का इतिहास भी बेहद खास है। 1899 में सिंधिया राजवंश ने इस भवन का निर्माण कराया था। बाद में यहां अस्पताल संचालित हुआ और आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों का इलाज किया जाता था। लेकिन कंपू रोड पर हजार बिस्तर का अस्पताल बनने के बाद अस्पताल के अलग-अलग विभाग यहां से शिफ्ट कर दिए गए। इसके बाद इस पुरानी बिल्डिंग को लेकर संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था। लेकिन प्रस्ताव और दावों के बीच तस्वीर अब ये है कि पुरानी बिल्डिंग देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही है और इसी बदहाल परिसर में राष्ट्रपिता की प्रतिमा भी ताले के पीछे बंद है।
बदहाल विरासत की कब लेंगे सुध ?
एक तरफ गांधी जयंती पर स्वच्छता, सेवा और गांधी के विचारों को याद किया जा रहा है, दूसरी तरफ बापू की प्रतिमा के आसपास की ये तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं कि क्या गांधी को सिर्फ माल्यार्पण और भाषणों तक ही याद रखा जाएगा? तस्वीरें साफ बोलती हैं की बापू कि प्रतिमा पर मकड़जाल की माला है, उनके आसपास का माहौल उनके विचारों से बिल्कुल उलट नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि गांधी जयंती के मौके पर सामने आई इन तस्वीरों के बाद जिम्मेदार महकमा इस बदहाल विरासत और ताले में बंद बापू की सुध कब लेता है।
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