कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में कोटवारों की काम बंद हड़ताल से अब स्वामित्व योजना का काम प्रभावित होने की आशंका है। कोटवारों का कहना है कि योजना के तहत जमीनों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया में वे गवाह की भूमिका निभाते हैं, लेकिन मांगें पूरी नहीं होने तक काम बंद रखने के फैसले से व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। प्रदेश के करीब 38 हजार कोटवार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि तीन साल से वर्दी के लिए राशि तक नहीं मिली, जबकि सरकार से मानदेय बढ़ाने और नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की मांग लंबे समय से की जा रही है। ऐसे में आगामी 31 अक्टूबर को भोपाल में प्रदेश स्तरीय बड़ा प्रदर्शन होगा।
दरअसल, मध्य प्रदेश के कोटवार अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लामबंद हो गए हैं। मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर मांगों के निराकरण की अपील की है, कोटवारों का कहना है कि वे गांवों में राजस्व और प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी सेवा और सुविधाओं से जुड़े मुद्दे लंबित हैं। कोटवारों की हड़ताल का असर स्वामित्व योजना पर भी पड़ सकता है। कोटवारों के मुताबिक, योजना के तहत जमीनों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया में उनकी गवाही और स्थानीय जानकारी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में काम बंद पर रहने से संबंधित कामो में देरी की आशंका है।
सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने समेत ये है मांगें
कोटवारों की प्रमुख मांग है कि प्रदेश के करीब 38 हजार कोटवारों को नियमित शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और उनके लिए उचित वेतनमान तय किया जाए। इसके अलावा मानदेय में बढ़ोतरी, तीन साल से लंबित वर्दी की राशि का भुगतान, पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ देने की मांग भी उठाई गई है। कोटवारों ने आरोप लगाया है कि वर्दी के लिए निर्धारित राशि नहीं मिलने के बावजूद उनसे लगातार जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि गांवों में राजस्व संबंधी कामकाज से लेकर प्रशासनिक सूचनाएं पहुंचाने तक वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन इसके अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
ज्ञापन में कोटवारों की नियुक्ति व्यवस्था, सेवा सुरक्षा, मानदेय और परिवार को आर्थिक सहायता देने जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं। संगठन ने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि सरकार कोटवारों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और हड़ताल के चलते स्वामित्व योजना सहित राजस्व संबंधी कामकाज पर पड़ने वाले संभावित असर से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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