राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ‘फांसी घर’ मामले में 6 मार्च को विशेषाधिकार समिति के सामने उपस्थित होंगे। सूत्रों के मुताबिक, केजरीवाल ने समिति के समन के जवाब में पत्र लिखकर अपनी उपस्थिति की जानकारी दी है। माना जा रहा है कि यह मामला उनके एक बयान को लेकर उठे विशेषाधिकार हनन के आरोप से जुड़ा है। इस बीच, केजरीवाल ने राजधानी में प्रदूषण, सड़कों की बदहाल स्थिति और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर रेखा गुप्ता सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है और सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से काम नहीं कर रही।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘फांसी घर’ मामले में 6 मार्च को विशेषाधिकार समिति के सामने उपस्थित होने की पुष्टि की है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा, “दिल्ली प्रदूषण से जूझ रही है। सड़कें टूटी पड़ी हैं। हर तरफ कूड़े के ढेर हैं। अस्पतालों में दवाइयां नहीं हैं। दिल्ली विधानसभा ने ‘फांसी घर’ पर प्रश्न पूछने के लिए मुझे बुलाया है। मैंने विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि उनके समन के अनुसार मैं 6 मार्च को उपस्थित रहूंगा। पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए समिति से मेरी विनती है कि कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाए।” केजरीवाल ने अपने संदेश में राजधानी में प्रदूषण, सड़कों की स्थिति, कूड़ा प्रबंधन और अस्पतालों में दवाइयों की कमी जैसे मुद्दों को उठाते हुए मौजूदा सरकार पर अप्रत्यक्ष निशाना भी साधा।
अरविंद केजरीवाल ने पत्र को किया शेयर?
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच X पर विशेषाधिकार समिति को भेजी गई अपनी चिट्ठी भी साझा की है। पत्र में केजरीवाल ने लिखा है, “मैं दिल्ली विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियम 172 और 220 के तहत 18 फरवरी को जारी किए गए समन की प्राप्ति स्वीकार करता हूं। मैं 6 मार्च को दोपहर 3 बजे विशेषाधिकार समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहूंगा। पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही के हित में आग्रह करता हूं कि कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए।” केजरीवाल ने पहले भी अपनी पोस्ट में राजधानी में प्रदूषण, सड़कों की बदहाल स्थिति, कूड़े के ढेर और अस्पतालों में दवाइयों की कमी जैसे मुद्दे उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा था।
क्या है फांसी घर?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की राजनीति में जिस ‘फांसी घर’ का जिक्र इन दिनों हो रहा है, उसकी कहानी ब्रिटिश काल से जुड़ी बताई जाती है। साल 1912 में, जब कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) की जगह दिल्ली को भारत की राजधानी बनाया गया, उसी दौर में दिल्ली विधानसभा भवन क्षेत्र में कुछ औपनिवेशिक संरचनाओं का निर्माण हुआ था। बताया जाता है कि इसी अवधि में एक सुरंगनुमा ढांचा तैयार किया गया था, जो बाद में चर्चा का विषय बना।
साल 2016 में दिल्ली विधानसभा भवन के नीचे एक सुरंग मिलने की जानकारी सामने आई। इसे अंग्रेजों के शासनकाल की संरचना बताया गया। इस खोज के बाद ऐतिहासिक महत्व को लेकर बहस छिड़ी। साल 2021 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने परिसर में एक ‘फांसीघर’ जैसी संरचना मिलने का दावा किया। बताया गया कि इसका प्रवेश द्वार विधानसभा भवन के ठीक नीचे स्थित है। बाद में उस समय की आम आदमी पार्टी सरकार ने इस स्थान का जीर्णोद्धार कराया और इसे ‘फांसीघर’ के रूप में प्रस्तुत करते हुए उद्घाटन किया।
अब क्यों चर्चा में है मामला?
वर्तमान में यह मुद्दा फिर से चर्चा में है क्योंकि इस विषय पर पूछे गए प्रश्नों और बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही और नेताओं के बयान इस ऐतिहासिक संरचना को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आए हैं।
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