Hanuman Beniwal Farmers Protest: राजस्थान के घड़साना में सिंचाई पानी की मांग को लेकर चल रहा किसानों का महापड़ाव तेज हो गया है। मांगों पर लिखित समझौता नहीं होने और प्रशासन को दिया गया रात 9:15 बजे तक का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल ने किसानों के साथ श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय की ओर कूच का ऐलान किया।

इसके बाद घड़साना धानमंडी में मौजूद किसान ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों के काफिले के साथ आगे बढ़ने लगे। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने पूरे मार्ग पर सुरक्षा बढ़ा दी और कई जगह बैरिकेडिंग की गई।

लिखित समझौता नहीं होने पर कूच का ऐलान

किसानों और प्रशासन के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद मांगों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। किसान लिखित समझौते पर अड़े हैं। रात 9:15 बजे की समय-सीमा समाप्त होने के बाद हनुमान बेनीवाल ने किसानों को संबोधित करते हुए श्रीगंगानगर की ओर कूच का ऐलान किया।

आंदोलन में अनूपगढ़, खाजूवाला और घड़साना क्षेत्र के किसान शामिल हैं। प्रशासन ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए क्यूआरटी, आरएसी और अतिरिक्त पुलिस बल को अलर्ट पर रखा है। अधिकारियों की ओर से किसान नेताओं से संपर्क कर समाधान निकालने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

बेनीवाल बोले- लड़ाई किसानों के हक की

धानमंडी में किसानों को संबोधित करते हुए हनुमान बेनीवाल ने कहा कि यह लड़ाई किसानों के हक और स्वाभिमान की है। उन्होंने दावा किया कि इस आंदोलन में जीत किसानों की होगी और अगर हार हुई तो उनकी होगी। बेनीवाल ने कहा कि जब तक सरकार किसानों की मांगें नहीं मानती, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आगे जयपुर में सचिवालय के घेराव की चेतावनी भी दी।

बाजार बंद, यातायात पर असर

‘खेत बचाओ-किसान बचाओ’ संघर्ष समिति के समर्थन में स्थानीय संयुक्त व्यापार मंडल ने घड़साना और आसपास के कस्बों में बाजार बंद रखे। किसानों के कूच और बाजार बंद होने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। हाईवे और प्रमुख मार्गों पर भी यातायात प्रभावित होने की जानकारी सामने आई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए काफिले के मार्ग पर पुलिस बल तैनात किया है। किसानों के आगे बढ़ने के बीच अधिकारियों की नजर स्थिति पर बनी हुई है।

सिंचाई पानी और छह महीने के रेगुलेशन की मांग

किसानों की प्रमुख मांग अनूपगढ़ शाखा नहर प्रणाली में पानी की कमी दूर कर नहर के अंतिम छोर तक पर्याप्त पानी पहुंचाने की है। इसके साथ ही किसान छह महीने का स्थायी सिंचाई रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि चार में से कम से कम दो समूहों को पर्याप्त पानी दिया जाए, ताकि फसलों की बिजाई और आगे की सिंचाई प्रभावित न हो। किसान पिछले सीजन में खराब हुई फसलों की विशेष गिरदावरी, उचित मुआवजे और बीमा क्लेम की प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी उठा रहे हैं।

चार मांगों पर अड़े किसान

किसान नेता नरेंद्र मान के मुताबिक, आंदोलन की चार प्रमुख मांगें हैं। इनमें अनूपगढ़ शाखा नहर में छह महीने का स्थायी रेगुलेशन, चार में से दो समूहों को पर्याप्त सिंचाई पानी, संबंधित सिंचाई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और फसल खराबे की विशेष गिरदावरी के बाद बीमा क्लेम व उचित मुआवजा शामिल हैं।

किसानों का कहना है कि पानी की कमी के कारण बिजाई के समय परेशानी हो रही है। उनका मानना है कि स्थायी जल प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होने पर हर सीजन में सिंचाई पानी को लेकर आंदोलन की स्थिति बन सकती है।

10 सितंबर से शुरू हुआ आंदोलन, 18 सितंबर से महापड़ाव

किसान नेता नरेंद्र मान ने बताया कि सिंचाई पानी सहित चार सूत्री मांगों को लेकर किसानों ने 10 सितंबर को आंदोलन शुरू किया था। शुरुआती दौर में प्रदर्शन कर प्रशासन के सामने समस्याएं रखी गईं। समाधान नहीं निकलने पर 18 सितंबर से घड़साना उपखंड कार्यालय के सामने महापड़ाव शुरू कर दिया गया। इसके बाद आंदोलन का दायरा बढ़ता गया। किसानों और सरकारी प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन मांगों पर लिखित सहमति नहीं बन सकी।

वार्ता में आश्वासन मिला, किसान लिखित समझौते पर कायम

शुक्रवार देर शाम घड़साना पंचायत समिति में हुई वार्ता में पूर्व मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी, निहालचंद मेघवाल और विधायक गुरवीर सिंह बराड़ सहित अन्य नेता शामिल हुए। बैठक में सिंचाई रेगुलेशन, फसल खराबे के मुआवजे, बीमा क्लेम और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

किसान नेता नरेंद्र मान ने वार्ता को सकारात्मक बताया था। उनके अनुसार, सरकारी प्रतिनिधियों ने एक-दो दिन में समाधान की दिशा में पहल करने का आश्वासन दिया। हालांकि, किसान लिखित समझौते की मांग पर कायम रहे। अल्टीमेटम खत्म होने के बाद श्रीगंगानगर कूच का ऐलान आंदोलन में आगे की रणनीति का अहम मोड़ बन गया।

पढ़ें ये खबरें