अखिलेश बिल्लौरे, हरदा। एमपी के हरदा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कागजों में “हर घर नल, हर घर जल” का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। कई गांवों में योजना के तहत नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही, जिसके कारण ग्रामीणों को आज भी दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। छोटी-छोटी बच्चियां सिर पर केन और घड़े रखकर पानी ढोने को मजबूर हैं।

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टिमरनी ब्लॉक अंतर्गत वनांचल क्षेत्र की ग्राम पंचायत बांसपानी के आश्रित गांव बोबदा में 47 लाख रुपये की लागत से बनाई गई नल-जल योजना 7 मार्च 2025 को पंचायत को हैंडओवर कर दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआती कुछ महीनों तक ही पानी मिला, उसके बाद सप्लाई ठप हो गई। सरपंच, सचिव और संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला।

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इस मामले के सामने आने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर उठने लगे हैं। जब योजना सुचारू रूप से संचालित नहीं हो रही थी, तो किस आधार पर इसे हैंडओवर किया गया? क्या तकनीकी जांच और गुणवत्ता परीक्षण पूरे किए गए थे? आलम अभी फरवरी में यह है तो गर्मी में क्या हालात होंगे।

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ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अधिकांश गांवों में ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि लोगों को पानी के लिए भटकना पड़े, तो यह योजना के उद्देश्य पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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