दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के जबलपुर में हाल ही में 400 करोड़ रुपए के ब्रिज ने 4 साल में ही दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद अब नर्मदापुरम में भी इसी तरह की दुर्घटनाएं सामने आ सकती हैं। दरअसल, संभाग में 36 पुल है, जिसमें से 29 जर्जर हालत में है। वहीं 7 पुल डेंजर है, जिनकी स्थिति बहुत खराब है।
सेमरी हरचंद के पास बने पुल की तो नर्मदापुरम को पिपरिया से जोड़ने वाले स्टेट हाइवे -67 पर भारी वाहनों और बसों की आवाजाही बनी रहती है। 45 मीटर लंबे इस जर्जर पुल के भरोसे नर्मदापुरम ओर पिपरिया जुड़ा हुआ है। नाले पर बना ये पुल एमपीआरडीसी की सूची में वैरी पुअर श्रेणी में है। 11 जर्जर बॉक्स पर टिके इस पुल की रेलिंग साथ छोड़ चुकी हैं। इसके बीचोंबीच कई जगह सीमेंट-कांक्रीट और लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं।
पुल से माखननगर समेत आसपास के दर्जनों गांव के वाहनों की आवाजाही रहती है। इस मार्ग से यात्री वाहन हिल स्टेशन पचमढ़ी, छिंदवाड़ा होते हुए नागपुर तक जाते हैं। स्टेट हाइवे के जिन पुलों के सहारे लाखों जिंदगियां हैं, उनकी औसत आयु 40 साल से अधिक है। कई पुल 50 साल से अधिक पुराने हैं। इन पुलों से रोजाना हजारों वाहन गुजर रहे हैं, इनमें भारी वाहन व यात्री बसें भी शामिल हैं।
पुल में सीमेंट कवरिंग खत्म हो चुकी है। पानी के संपर्क में आने से एप्रोच रोड भी खराब हो गई है। ये अचानक ढह सकते हैं। एमपीआरडीसी के सियाराम अहिरवार बोले की जर्जर पुलों के निर्माण और मरम्मत के लिए स्वीकृति हो चुकी है। लगभग 2,3 महीने में इनका काम भी हो जायेगा। कुछ में टेंडर प्रक्रिया जारी है। तीन से चार महीने में सभी पुल दुरुस्त हो जाएंगे।

