कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के करीब 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं से जुड़ी एक बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने बिजली वितरण निगमों की 1134.54 करोड़ रुपये की फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (FSA) वसूली संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है। पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने आयोग के इस निर्णय को उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बिजली निगमों की देरी या प्रशासनिक खामियों का आर्थिक भार आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता।

प्रो. संपत सिंह के अनुसार, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने नवंबर 2025 की एफएसए राशि की वसूली की अनुमति मांगी थी। उनका कहना है कि निर्धारित अवधि में इस राशि को बिजली बिलों में शामिल नहीं किया गया। नियमों के मुताबिक जनवरी 2026 में संबंधित राशि जब्त हो गई थी, इसके बावजूद निगमों की ओर से दोबारा इसकी वसूली का प्रयास किया गया।

संपत सिंह ने बताया कि उन्होंने आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान निगमों की इस मांग पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने तर्क दिया था कि बिजली कंपनियां निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा का पालन नहीं करने के बाद उस देरी का वित्तीय असर उपभोक्ताओं पर नहीं डाल सकतीं। आयोग द्वारा 1134.54 करोड़ रुपये की वसूली की मांग स्वीकार नहीं किए जाने के बाद उन्होंने इसे उपभोक्ताओं के पक्ष में अहम निर्णय बताया।

पूर्व मंत्री ने कहा कि इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि बिजली वितरण कंपनियों को नियामकीय नियमों और तय समय-सीमा के अनुसार काम करना होगा। यदि किसी स्तर पर देरी होती है या प्रशासनिक स्तर पर चूक होती है तो उसकी कीमत बिजली उपभोक्ताओं से वसूलना उचित नहीं है।

संपत सिंह ने कहा कि बिजली से जुड़े कई अन्य मुद्दे अभी भी लंबित हैं। उनके मुताबिक वर्ष 2021 से उपभोक्ताओं को मिलने वाले कई नकारात्मक फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट का लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2027-28 के अनुमानित वार्षिक राजस्व प्राप्तियों से संबंधित आगामी सुनवाई में भी वे इन मुद्दों को आयोग के सामने उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि फिक्स्ड चार्ज, बिजली की बढ़ती दरों और नगर निकायों से जुड़े टैक्स के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के साथ छोटे कारोबारियों पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है। इन मुद्दों को आगामी सुनवाई में प्रमुखता से उठाकर उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बोझ की समीक्षा की मांग की जाएगी।