चंडीगढ़। हरियाणा में नकली और घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। आम लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग ने प्रदेशभर में व्यापक जांच अभियान चलाया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली दवा बिक्री और निर्माण इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 966 ड्रग सेल लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। वहीं, 15 लाइसेंस पूरी तरह रद्द किए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने FDA अधिकारियों को नकली दवाओं का निर्माण और बिक्री करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

छह महीने में 13,590 मेडिकल बिक्री केंद्रों की जांच

FDA विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक ड्रग विंग ने प्रदेश में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान दवाइयों की बिक्री करने वाली 13,590 इकाइयों और 423 दवा निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया गया।

जांच के दौरान सामने आई अनियमितताओं पर विभाग ने कार्रवाई करते हुए 966 ड्रग सेल लाइसेंस और 12 मैन्युफैक्चरिंग एवं ब्लड सेंटर लाइसेंस निलंबित किए। इसके अलावा 15 लाइसेंस पूरी तरह रद्द किए गए, जबकि 5 लाइसेंस आंशिक रूप से निरस्त किए गए।

2,389 दवाओं के सैंपल लिए, 11 जांच में मिले घटिया

दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों से 2,389 नमूने एकत्र किए। इनमें से 2,189 सैंपलों की जांच पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट में 11 नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें सब-स्टैंडर्ड पाया गया।

विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी तेज की है। इस अवधि में 64 मामलों में अभियोजन दर्ज कराया गया। वहीं, अदालतों में पहले से लंबित 15 मामलों का निपटारा हुआ। इनमें 8 मामलों में आरोपियों को सजा सुनाई गई, जबकि 7 मामलों में बरी कर दिया गया। फिलहाल 462 मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं।

पुलिस के साथ मिलकर 376 जगहों पर छापेमारी

नकली दवाओं और प्रतिबंधित औषधियों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए FDA और पुलिस अधिकारियों ने संयुक्त रूप से 376 छापेमारी की। इन कार्रवाइयों के दौरान NDPS एक्ट के तहत 2 और MTP एक्ट के तहत 4 एफआईआर दर्ज की गईं।

70 लाख के नकली मौनजारो इंजेक्शन जब्त, BP की दवा बनाने वाला गिरोह भी पकड़ा

प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कई बड़े मामले सामने आए। अप्रैल 2026 में FDA की टीम ने करीब 70 लाख रुपये कीमत के नकली वजन घटाने और डायबिटीज नियंत्रण से जुड़े मौनजारो इंजेक्शन जब्त किए।

इसके बाद जुलाई 2026 में FDA गुरुग्राम की टीम ने नकली BP की दवा ‘टेल्मा-एएम’ का निर्माण और बिक्री करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया। वहीं, 28 जुलाई 2026 को FDA फरीदाबाद की टीम ने शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करते हुए नकली प्रोपलीन ग्लाइकोल की बड़ी खेप भी बरामद की।

नए लाइसेंस जारी करने के साथ गुणवत्ता मानकों पर भी जोर

प्रवक्ता ने बताया कि विभाग की कार्रवाई केवल अनियमितताओं पर रोक लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दवा निर्माण और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इस अवधि में 2,675 रिटेल और होलसेल ड्रग लाइसेंस जारी किए गए। इसके साथ ही 20 मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस दिए गए और 14 चिकित्सा संस्थानों को मान्यता प्रदान की गई।

दवा निर्माण की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए दो निर्माण इकाइयों को WHO-GMP स्तर पर अपग्रेड भी किया गया है।

आरती सिंह राव बोलीं- दवाओं की गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि हरियाणा सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। नकली दवाओं का कारोबार करने और लोगों की जिंदगी खतरे में डालने वाले तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में दवाइयों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक शुद्ध, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां पहुंचाना है। इसके लिए FDA विभाग का निरीक्षण और कार्रवाई अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।