चंडीगढ़। हरियाणा में मछली और झींगा पालन करने वालों के लिए राहत की खबर है। अब कृषि फीडर से बिजली लेने वाले मत्स्य और झींगा पालकों को सिर्फ 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी। राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की इस बजट घोषणा को पूरा कर दिया है। इससे मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को बिजली खर्च में राहत मिलेगी।

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण तथा मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि सरकार मत्स्य पालकों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। उन्हें अच्छी गुणवत्ता का मछली बीज मिलेगा। मछली और झींगा बेचने के लिए अलग मंडियों की व्यवस्था भी की जाएगी।

40 किलोवाट तक के कनेक्शन पर भी राहत

बिजली दरों में राहत का लाभ गैर-कृषि फीडर से जुड़े कुछ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। सरकार ने 20 किलोवाट तक के लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) और कृषि उद्योग श्रेणी के तहत 4.75 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू की है।

इस श्रेणी में लोड की सीमा भी बढ़ाई गई है। पहले यह सीमा 20 किलोवाट थी, जिसे बढ़ाकर 40 किलोवाट कर दिया गया है। साथ ही बिजली की दर 6.60 रुपये से घटाकर 4.75 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है।

तीन जिलों में खुलेंगी मिट्टी और पानी की जांच प्रयोगशालाएं

मत्स्य पालन में बेहतर उत्पादन के लिए सरकार यमुनानगर, रोहतक और फरीदाबाद में मिट्टी एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। तीनों प्रयोगशालाओं पर करीब 6.04 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इनके मार्च 2027 तक शुरू होने की संभावना है।

इन प्रयोगशालाओं में मिट्टी और पानी की जांच से मत्स्य पालकों को उत्पादन से जुड़ी समस्याओं को समझने और उचित कदम उठाने में मदद मिलेगी।

मछली बीज फार्मों पर खर्च होंगे 20.48 करोड़ रुपये

सरकार ज्योतिसर और सांपला स्थित सरकारी मत्स्य बीज फार्मों को मजबूत बनाने और उनका नवीनीकरण करने पर भी काम कर रही है। इन दोनों फार्मों पर लगभग 20.48 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके बाद दूसरे सरकारी मत्स्य बीज फार्मों का भी चरणबद्ध तरीके से सुधार किया जाएगा।

इसका उद्देश्य मत्स्य पालकों को बेहतर गुणवत्ता का मछली बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है।

हिसार और फरीदाबाद में बनेंगी आधुनिक मछली मंडियां

मछली और झींगा पालकों को केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि बिक्री के लिए भी बेहतर सुविधाएं देने की तैयारी है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हिसार और फरीदाबाद में दो आधुनिक मछली मंडियां स्थापित की जाएंगी। इन पर कुल 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इन मंडियों को मंजूरी दे दी है। अब इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

करनाल में 50 करोड़ की लागत से बनेगी प्रसंस्करण इकाई

मछली कारोबार को बढ़ावा देने के लिए करनाल में मछली प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है। इस परियोजना पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने ये जानकारियां विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक के बाद दीं। बैठक में मुख्यमंत्री और बजट घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को लंबित घोषणाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिए।