संजीव, सोनीपत। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल के कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में जल को जीवन का आधार माना गया है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली में पानी के अंधाधुंध उपयोग ने परिस्थितियां बदल दी हैं। हरियाणा में भूजल दोहन का स्तर बढ़कर 136.75 फीसदी पहुंच गया है। इसका मतलब है कि राज्य में जितना भूजल सालाना रिचार्ज हो सकता है, उससे 36.75 फीसदी अधिक पानी जमीन से बाहर निकाला जा रहा है।

मुरथल यूनिवर्सिटी में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग तथा विश्वविद्यालय के रसायन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित जल संरक्षण कार्यक्रम में कुलगुरु मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

वेदों की जल-दृष्टि और आधुनिक विज्ञान

प्रो. सिंह ने ऋग्वेद का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में हजारों साल पहले ही जल को कल्याणकारी और औषधीय गुणों से युक्त मान लिया गया था। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि वैदिक काल की जल के प्रति सम्मान की भावना को आधुनिक विज्ञान की जल प्रबंधन तकनीकों के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने एक्विफर मैपिंग (Aquifer Mapping) की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इसके जरिए जमीन के नीचे पानी की उपलब्धता, गहराई और भंडारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकता है।

सिर्फ रिचार्ज नहीं, दोहन रोकना भी जरूरी

कुलगुरु ने कहा कि केवल बारिश का पानी जमीन में उतारना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनावश्यक भूजल दोहन को भी कम करना होगा। इसके लिए कम पानी वाली सिंचाई तकनीकों, फसल विविधीकरण और उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, सैटेलाइट और जीआईएस तकनीक की मदद से भूजल स्तर में होने वाले बदलावों का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जल सुरक्षा को केवल पर्यावरण का विषय नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध खाद्य सुरक्षा, कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा से है।

पानी भविष्य का सबसे बड़ा रणनीतिक संसाधन: कुलसचिव

कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमित कुमार ने कहा कि पानी का विषय केवल सभागार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे समाज की गहरी जड़ों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने चेताया कि भविष्य में तेल और ऊर्जा की तरह पानी भी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संसाधन और शक्ति बनने जा रहा है, क्योंकि ऊर्जा के बिना अर्थव्यवस्था चल सकती है लेकिन पानी के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। उन्होंने ग्रामीण जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि जल संरक्षण की कोई भी रणनीति तभी सफल होगी जब उसमें समाज के हर वर्ग की सामूहिक भागीदारी हो। कार्यक्रम के अंत में रसायन विभागाध्यक्षा प्रो. सोनिया नैन ने विभाग की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।

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