पांच फसलों की होगी पहचान, उत्पादन से लेकर बाजार तक की तैयार होगी रणनीति; किसानों का जिला और फसलवार प्रमाणित रिकॉर्ड भी बनेगा

Haryana Natural Farming : चंडीगढ़। हरियाणा में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार नई पहल करने जा रही है। इसके तहत ऐसी फसलों की पहचान की जाएगी, जिनकी खेती से किसानों को बेहतर कमाई हो सके। हल्दी, लाल मिर्च और अदरक जैसी फसलों को इसमें शामिल करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सरकार ने कम से कम पांच ऐसी फसलों का चयन करने की तैयारी की है, जिनके उत्पादन और बिक्री के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को इन फसलों के उत्पादन, किसानों को प्रोत्साहन, प्रमाणन और मार्केटिंग की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का जोर केवल प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ाने पर नहीं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाने पर भी है।

पांच फसलों का होगा चयन, हल्दी-अदरक पर खास नजर

प्राकृतिक खेती को आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाने के लिए सरकार कम से कम पांच उपयुक्त फसलों की पहचान करेगी। इनमें हल्दी, लाल मिर्च और अदरक जैसी फसलों की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।

इसके लिए उन कृषि क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा, जहां इन फसलों की खेती बेहतर तरीके से हो सकती है। साथ ही उत्पादन का लक्ष्य तय करने और ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस अभियान से जोड़ने की योजना बनाई जाएगी।

किसानों का जिला और फसलवार रिकॉर्ड होगा तैयार

सरकार प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों की पूरी जानकारी जुटाएगी। कृषि एवं बागवानी विभाग को जिला और फसल के हिसाब से प्रमाणित डाटा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस रिकॉर्ड में कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी:

  • प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या।
  • किसान समूहों का विवरण।
  • खेती के कुल रकबे की जानकारी।
  • फसलवार प्रमाणन की स्थिति।
  • संभावित उत्पादन का आंकड़ा।
  • बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध उपज।

इससे सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि किस जिले में कौन-सी फसल का उत्पादन कितना हो रहा है और उसके लिए किस तरह की बाजार व्यवस्था की जरूरत है।

HAFED के जरिए किसानों को बेहतर दाम दिलाने की तैयारी

सरकार किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने के लिए हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन संघ (HAFED) की भूमिका भी बढ़ाना चाहती है। बैठक में HAFED के माध्यम से प्राकृतिक और जैविक उत्पादों की खरीद तथा बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा हुई।

इसका उद्देश्य प्रमाणित उत्पादों के लिए प्रभावी मार्केटिंग चैनल तैयार करना है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना न पड़े और उन्हें लाभकारी कीमत मिल सके।

खेत से बाजार तक उत्पादों की गुणवत्ता पर रहेगा जोर

सरकार प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखने के लिए भी व्यवस्था मजबूत करेगी। इसके तहत उत्पादों की जांच, प्रमाणन और खेत से बाजार तक उनकी पहचान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

किसानों के प्रशिक्षण, पंजीकरण और प्रमाणन के लिए मान्यता प्राप्त संस्थाओं से तकनीकी सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।

शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में बनी रणनीति

इस पूरी योजना को लेकर शुक्रवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ उत्पादों के प्रमाणन, खरीद और विपणन की एकीकृत व्यवस्था बनाने पर चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि कार्ययोजना में खेती के उपयुक्त क्षेत्र, उत्पादन लक्ष्य, किसानों की भागीदारी, प्रमाणन और बाजार की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए।

सरकार की इस पहल का मकसद प्राकृतिक खेती को किसानों के लिए कमाई का बेहतर विकल्प बनाना है। हल्दी, अदरक और लाल मिर्च जैसी फसलों के जरिए खेती में विविधता लाने और किसानों को नए बाजारों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

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