चंडीगढ़। हरियाणा की मंडियों में धान बेचने के लिए किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का दावा है कि मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उनकी फसल की खरीद नहीं हो पा रही है। कई-कई दिन तक उन्हें अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ रही है।
दूसरी ओर, प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा का कहना है कि सरकार ने धान खरीद के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
58 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य
सरकार ने खरीफ खरीद सीजन 2026-27 के लिए हरियाणा में 58 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है। इस बार खरीद एक अक्टूबर के बजाय 29 सितंबर से शुरू की गई थी। खरीद की निर्धारित अवधि 15 नवंबर तक है।
केंद्र सरकार ने धान की सामान्य किस्म का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। वहीं, ग्रेड-ए धान का एमएसपी 2,461 रुपये प्रति क्विंटल है।
17.25 लाख मीट्रिक टन धान मंडियों में पहुंचा
कृषि मंत्री के अनुसार, 11 अक्टूबर तक प्रदेश की मंडियों में करीब 17.25 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका था। इसमें से खरीद एजेंसियों ने 10.78 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था। खरीदे गए धान में से 4.19 लाख मीट्रिक टन का उठान भी हो चुका था।
सरकार ने खरीद प्रक्रिया के लिए प्रदेश में 278 मंडियां, खरीद केंद्र और अतिरिक्त खरीद स्थल बनाए हैं। इन सभी जगहों को जियो-फेंसिंग से जोड़ा गया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और हरियाणा राज्य भंडारण निगम खरीद का काम कर रहे हैं।
मंडियों में सुविधाएं देने का दावा
श्याम सिंह राणा ने कहा कि मंडियों में किसानों की सुविधा के लिए पीने के पानी, शौचालय, पानी की निकासी और हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए जरूरी प्रबंध किए गए हैं।
धान में नमी की समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत धान की कटाई से जुड़े निषेधात्मक आदेश भी जारी किए हैं।
मिलरों ने कराया पंजीकरण
मंत्री ने बताया कि पिछले साल प्रदेश में 1,458 राइस मिलरों ने कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) का काम किया था। इस साल 10 अक्टूबर तक 1,415 राइस मिलर इसके लिए पंजीकरण करवा चुके थे।
अब एक ओर सरकार खरीद और उठान के आंकड़े पेश कर रही है, तो दूसरी ओर किसान अपनी फसल बेचने में आ रही दिक्कतों की बात कह रहे हैं। किसानों की मांग है कि मंडियों में खरीद प्रक्रिया सुचारू हो, ताकि उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए कई-कई दिन इंतजार न करना पड़े.
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