कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। घर हो या बाहर, हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं के लिए मदद पाना कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में हरियाणा के सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सहारा दे रहे हैं। यहां पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा सहायता से लेकर कानूनी मदद और सुरक्षित आश्रय तक की सुविधा मिलती है। सितंबर 2026 तक प्रदेश में इन केंद्रों के माध्यम से 66,818 मामलों में सहायता दी जा चुकी है।

हरियाणा में फिलहाल 22 सखी सेंटर काम कर रहे हैं। इनमें से 10 केंद्र अपने भवनों में संचालित हैं। इसके अलावा पांच नए केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। इनका उद्देश्य हिंसा से प्रभावित महिलाओं को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही जगह जरूरी सहायता उपलब्ध कराना है।

मुसीबत में महिलाओं को मिलती हैं ये सुविधाएं

इन केंद्रों पर पहुंचने वाली महिलाओं को जरूरत के अनुसार इलाज, कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जाता है। एफआईआर दर्ज कराने और पुलिस सुरक्षा हासिल करने में भी मदद की जाती है। जिन महिलाओं के पास रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है, उन्हें अधिकतम 20 दिनों तक अस्थायी आश्रय दिया जा सकता है। इस दौरान उनके बच्चों के रहने की व्यवस्था भी शामिल है।

अगर किसी महिला को 20 दिनों से ज्यादा समय तक आश्रय की जरूरत हो, तो उसे दूसरे सरकारी या गैर-सरकारी संस्थान में भेजने की व्यवस्था है। इसके लिए करनाल के नारी निकेतन, रोहतक के महिला आश्रम और अन्य सहयोगी संस्थानों की मदद ली जा सकती है। गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उपचार दिलाने की व्यवस्था भी है।

किसी भी तरह की हिंसा पर ले सकती हैं मदद

सखी सेंटरों की सहायता केवल घरेलू हिंसा तक सीमित नहीं है। यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी, तेजाब हमला, ऑनर किलिंग और दूसरी तरह की हिंसा से प्रभावित महिलाएं भी यहां मदद ले सकती हैं।

आपात स्थिति में महिलाओं को सहायता दिलाने के लिए इन केंद्रों को महिला हेल्पलाइन 181, आपातकालीन नंबर 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से जोड़ा गया है। जरूरत पड़ने पर महिलाएं 181 या 112 पर संपर्क कर सकती हैं।

योजना का उद्देश्य यही है कि हिंसा झेलने वाली किसी भी महिला को मुश्किल समय में अकेले संघर्ष न करना पड़े और उसे सुरक्षा, उपचार तथा कानूनी मदद एक ही जगह मिल सके।