हरियाणा के 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले की जांच अब सीबीआई (CBI) ने शुरू कर दी है। दिल्ली में एफआईआर दर्ज होने के बाद 5 आईएएस अधिकारियों समेत कई बड़े अफसरों पर शिकंजा कसना तय है।

चंडीगढ़। हरियाणा के बहुचर्चित आईडीएफसी (IDFC) बैंक घोटाले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेंगी। सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने दिल्ली में पहली FIR दर्ज कर ली है। अब सीबीआई की एक विशेष टीम जल्द ही चंडीगढ़ और पंचकूला में डेरा डालेगी, जिसके बाद राज्य के कई रसूखदार लोगों और बड़े अफसरों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
कैसे हुआ करोड़ों का यह खेल?
पूरा मामला सरकारी भरोसे के साथ हुए बड़े धोखे का है। हरियाणा सरकार के 18 अलग-अलग विभागों ने अपनी बचत के करीब 590 करोड़ रुपये सुरक्षित निवेश के लिए आईडीएफसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने के लिए दिए थे। अफसरों ने पैसा तो बैंक को सौंप दिया, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में इसे कभी एफडी के रूप में जमा ही नहीं किया गया।
इस महाघोटाले की पोल तब खुली जब एक विभाग ने अपना खाता बंद कर पैसा दूसरे बैंक में ले जाना चाहा। जब बैंक स्टेटमेंट निकलवाया गया, तो सरकारी आंकड़ों और बैंक के बैलेंस में करोड़ों का अंतर मिला। 18 फरवरी 2026 के बाद जब बाकी विभागों ने भी अपने खातों की जांच की, तो पता चला कि जनता की कमाई के करोड़ों रुपये गायब हैं।
आईएएस अफसरों पर लटकी तलवार
अब तक इस मामले की जांच हरियाणा की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) कर रही थी। एसीबी की पड़ताल में सामने आया कि इस घोटाले को सरकारी अधिकारियों के संरक्षण में अंजाम दिया गया। जांच एजेंसी ने 5 आईएएस अधिकारियों समेत 6 वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार से अनुमति मांगी थी। अब सीबीआई के मैदान में आने से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब जांच का दायरा और भी ज्यादा निष्पक्ष और बड़ा होने वाला है।
बैंक मैनेजर और करीबियों ने बुना था जाल
इस घोटाले का मास्टरमाइंड तत्कालीन बैंक मैनेजर रिभव ऋषि को माना जा रहा है। जांच में पता चला कि उसने बैंक की नौकरी छोड़ने से पहले ही सरकारी फंड को निजी निवेश और प्रॉपर्टी में लगाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था। इसमें उसका साथ रिलेशनशिप मैनेजर अभय, उसकी पत्नी स्वाति और साले अभिषेक ने दिया। इन लोगों ने ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ नाम की फर्जी कंपनी बनाई और सरकारी पैसा इसी कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिया। बाद में इस रकम को शेयर बाजार और रियल एस्टेट में लगा दिया गया।
हरियाणा ब्यूरोक्रेसी में बड़ी गिरफ्तारियां और पूछताछ संभव
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सख्ती के बाद अब तक बैंक मैनेजर, दो वित्त अधिकारियों और कुछ ज्वैलर्स समेत कई लोग जेल जा चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में 19 जगहों पर छापेमारी कर चुका है। सीबीआई की एंट्री के बाद अब उन बड़े आईएएस अधिकारियों की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी, जो अब तक जांच के रडार पर थे। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में हरियाणा ब्यूरोक्रेसी में बड़ी गिरफ्तारियां और पूछताछ हो सकती है।
