Hasanamba Devi Temple: दिवाली पर देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। लेकिन कर्नाटक में एक ऐसा देवी मंदिर है, जो साल में सिर्फ एक बार कुछ दिनों के लिए खुलता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि कपाट बंद करते समय जलाया गया घी का दीपक अगले साल मंदिर खुलने पर भी जलता हुआ मिलता है। इतना ही नहीं, देवी को चढ़ाए गए फूल और रखा गया भोग भी खराब नहीं होता। यही वजह है कि दिवाली के आसपास इस मंदिर के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं मंदिर के कपाट
कर्नाटक के हासन शहर में स्थित हसनंबा देवी मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। यहां देवी हसनंबा को शक्ति स्वरूपिणी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के गर्भगृह के कपाट अश्विन मास की पूर्णिमा के बाद आने वाले गुरुवार को विशेष पूजा के साथ खोले जाते हैं। इसके बाद दीपावाली के आसपास श्रद्धालुओं को कुछ दिनों तक दर्शन का अवसर मिलता है। बलि प्रतिपदा के बाद मंदिर के कपाट फिर बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद अगले साल ही गर्भगृह के दर्शन होते हैं।
10 नवंबर तक कर सकेंगे दर्शन
इस साल मंदिर के कपाट 29 अक्टूबर को खोले गए हैं।श्रद्धालुओं के लिए 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक दर्शन की व्यवस्था है। 11 नवंबर को मंदिर के कपाट फिर बंद कर दिए जाएंगे हासन शहर बेंगलुर से करीब 187 किलोमीटर दूर है। यहां रेल और सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। नजदीकी रेलवे स्टेशन हासन जंक्शन है।
चावल का भोग भी नहीं होता खराब
इस मंदिर की सबसे चरचित विशेषता यहां का नंदा दीप है। कपाट बंद करने से पहले गर्भगृह में घी का दीपक जलाया जाता है। इसके बाद देवी को फूलों से सजाया जाता है और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। फिर मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि जब अगले साल मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तो दिया जलता हुआ मिलता है। फूल भी अपनी ताजगी बनाए रखते हैं,साथ ही देवी को चढ़ाए जाने वाला भोग कपाट बंद करने से पहले गर्भगृह में रखा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार अगले साल मंदिर खुलने पर यह भोग भी खबार नहीं होता।
सात मातृकाओं से जुड़ी है कथा
स्थानीय मान्यता के अनुसार सात मातृकाएं वाराणसी से दक्षिण भारत की यात्रा पर निकली थीं। हासन की सुंदरता से प्रभावित होकर उन्होंने यहीं निवास करने का फैसला किया। इन सात मातृ काओं के नाम ब्राह्मी, महेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी और चामुंडी हैं। मंदिर से जुड़ी कथा में देवी हसनंबा को राक्षस अंधकासुर का संहार करने वाली शक्ति के रूप में भी बताया जाता है।
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