हेमंत शर्मा, इंदौर। दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में बेसमेंट में पानी भरने से तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत का हादसा हुए दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है। उस घटना में शिकायतों, बेसमेंट के इस्तेमाल और नगर निगम की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। लेकिन इंदौर में अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां रहवासियों का आरोप है कि बेसमेंट की खुदाई को लेकर शिकायतें होने के बावजूद काम लगातार जारी है। सवाल यह नहीं कि निर्माण होना चाहिए या नहीं, सवाल यह है कि अगर नियमों और सुरक्षा को लेकर शिकायत पहले ही सामने आ चुकी है तो कार्रवाई कब होगी?मामला राजीव गांधी चौराहे के पास हरगोविंद नगर, प्लॉट नंबर 12, सेक्टर, वार्ड नंबर 74, जोन नंबर 13 का बताया जा रहा है।
परमिशन निरस्त होने का दावा, फिर भी खुदाई जारी?
रहवासियों का दावा है कि बेसमेंट निर्माण से संबंधित अनुमति निरस्त हो चुकी है और मामला नगर निगम के अपर आयुक्त स्तर तक भी पहुंचा है। इसके बावजूद मौके पर निर्माण कार्य लगातार चलने की बात कही जा रही है।अगर अनुमति वास्तव में निरस्त हो चुकी है और इसके बावजूद निर्माण जारी है, तो यह जांच का विषय है कि काम रोकने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और अब तक मौके पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
‘मकान धंस रहा है’… पड़ोसियों ने जताया बड़ा खतरा
पास की बिल्डिंग में रहने वाले लोगों ने शिकायत में बेसमेंट की खुदाई से उनके मकान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।रहवासियों का कहना है कि गहरी खुदाई के कारण आसपास की जमीन और निर्माण पर असर पड़ सकता है। उनका आरोप है कि अगर समय रहते काम नहीं रोका गया तो बारिश, मिट्टी खिसकने या निर्माण के दबाव के चलते कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है।फिलहाल इन आरोपों की तकनीकी पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में मौके की इंजीनियरिंग जांच और स्ट्रक्चरल सेफ्टी असेसमेंट बेहद महत्वपूर्ण होगा।
बिल्डिंग ऑफिसर को शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं?
रहवासियों के मुताबिक, मामले की शिकायत बिल्डिंग ऑफिसर विशाल राठौर से भी कई बार की गई। इसके बावजूद निर्माण कार्य रुकने का दावा नहीं किया जा रहा है।यहीं से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।जब शिकायत अधिकारी तक पहुंच चुकी थी, तो मौके का निरीक्षण हुआ या नहीं?अगर हुआ तो रिपोर्ट में क्या पाया गया?अगर निर्माण नियम विरुद्ध था तो काम क्यों नहीं रुका?और अगर निर्माण वैध है तो रहवासियों की सुरक्षा संबंधी शिकायत का समाधान क्या है?
इन सवालों का जवाब अब नगर निगम से अपेक्षित है
CM हेल्पलाइन पर शिकायत… और बिना समाधान बंद? इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू CM हेल्पलाइन से जुड़ा बताया जा रहा है।रहवासियों के मुताबिक लोकेश नाम के व्यक्ति ने CM हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन आरोप है कि समस्या का वास्तविक समाधान किए बिना ही शिकायत को बंद कर दिया गया।अगर शिकायतकर्ता के आरोप सही हैं, तो सवाल यह है कि कागज पर शिकायत का निराकरण हुआ या जमीन पर भी कार्रवाई हुई?क्योंकि शिकायत बंद करना और समस्या खत्म होना—दोनों अलग-अलग बातें हैं।
क्या ‘सेटिंग’ से चल रहा है काम?
रहवासियों ने नगर निगम अधिकारियों और निर्माणकर्ता के बीच कथित ‘सेटिंग’ के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।ऐसे आरोपों की सच्चाई का पता सिर्फ एक तरीके से लगाया जा सकता है—मौके का निष्पक्ष निरीक्षण, स्वीकृत नक्शे और परमिशन की जांच, निर्माण की वर्तमान स्थिति का मिलान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल।बिना जांच किसी अधिकारी या निर्माणकर्ता को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
G+4 बिल्डिंग और सिर्फ 32 हजार रुपये शुल्क का दावा
रहवासियों ने निर्माण की अनुमति और शुल्क को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।उनका दावा है कि G+4 बिल्डिंग का नक्शा महज 32 हजार रुपये की फीस में स्वीकृत किया गया, जबकि उनके मुताबिक लागू नियमों के तहत शुल्क इससे अधिक होना चाहिए।यह दावा भी दस्तावेजों से जांचे जाने की जरूरत है। स्वीकृत नक्शा, बिल्डिंग परमिशन, शुल्क की रसीद और उस समय लागू नगर निगम के शुल्क नियम सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
दिल्ली में शिकायत के बावजूद हुआ था हादसा, इंदौर में चेतावनी पहले से मौजूद?
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में हुए हादसे में सामने आया था कि बेसमेंट के इस्तेमाल को लेकर घटना से करीब एक महीने पहले शिकायत की गई थी। बाद में तीन UPSC अभ्यर्थियों की बेसमेंट में पानी भरने से मौत हो गई। MCD की जांच में बेसमेंट के इस्तेमाल और जलभराव से जुड़े कई सवाल सामने आए थे। इंदौर का मामला उससे अलग है—यहां अभी कोई हादसा नहीं हुआ है। लेकिन अगर रहवासियों की सुरक्षा संबंधी शिकायत सही है, तो हादसा होने का इंतजार करने के बजाय पहले ही जांच और कार्रवाई होना जरूरी है।
इंदौर में हादसे के बाद जागेगा नगर निगम या शिकायत के बाद ही रोकेगा काम?
हरगोविंद नगर के इस निर्माण को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर निगम कब मौके पर जाकर स्थिति साफ करेगा?अगर निर्माण नियमों के मुताबिक है, तो रहवासियों को स्पष्ट जानकारी दी जाए। अगर अनुमति निरस्त है, तो काम क्यों जारी है—इसकी जांच हो।अगर बेसमेंट की खुदाई से आसपास के मकानों को खतरा है, तो तकनीकी जांच कराई जाए।और अगर CM हेल्पलाइन की शिकायत बिना वास्तविक समाधान के बंद की गई है, तो उसकी भी जवाबदेही तय हो। दिल्ली का बेसमेंट हादसा यह सबक छोड़ गया कि शिकायत और खतरे को नजरअंदाज करने की कीमत बहुत भारी हो सकती है। इंदौर में फिलहाल हादसा नहीं हुआ है—लेकिन सवाल यह है कि नगर निगम कार्रवाई हादसे से पहले करेगा या फिर हादसे के बाद फाइलें खुलेंगी?
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