हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला प्रकरण को लेकर शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। इस दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी दलीलें रखीं, जबकि अधिवक्ता विनय जोशी सहित अन्य वकील कोर्ट में मौजूद रहे। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर अपना रिजॉइंडर पेश करते हुए उनका खंडन किया।कोर्ट में पेश आदेश के अनुसार, हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपने तर्कों को पूर्ण करते हुए रिजॉइंडर की बहस समाप्त कर दी है। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद सहित अन्य वकीलों ने जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 11 मई 2026 तय की है।

रिजॉइंडर में हिंदू पक्ष के प्रमुख तर्क

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने स्पष्ट किया कि भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए इस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता। साथ ही यह भी दलील दी गई कि यह मामला सिविल सूट नहीं बल्कि रिट याचिका है, जो हिंदू पक्ष के मौलिक अधिकारों के संरक्षण से जुड़ा हुआ है। हिंदू पक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने पूरे दिन निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी और मामले को शीघ्र निपटारे के लिए हाईकोर्ट भेजा था, जिसके बाद से लगातार सुनवाई जारी है।

पिछले घटनाक्रम का हवाला

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से भोजशाला के धार्मिक स्वरूप निर्धारण और पूर्ण अधिकार की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी। इसके बाद 2024 में ASI द्वारा 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी किया गया। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, अगली सुनवाई 11 मई को होगी, जिसमें मुस्लिम पक्ष अपने रिजॉइंडर तर्क प्रस्तुत करेगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली तारीख पर सभी संबंधित अधिवक्ता अपने तर्क पूर्ण करेंगे और लिखित प्रस्तुतियां भी दे सकते हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी। 

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