अभय मिश्रा, मऊगंज। त्योहारों का उल्लास तब तक सुरक्षित है जब तक कानून का पहरा सख्त है। मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज में इस बार होली के रंग में भंग न पड़े, इसके लिए पुलिस प्रशासन ने लोहे की दीवार खड़ी कर दी है। पिछले साल गड़रा गांव में हुई खूनी हिंसा और एक जांबाज एएसआई की शहादत को पुलिस भूली नहीं है। यही कारण है कि इस बार मऊगंज को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। रीवा से अतिरिक्त बल बुलाया गया है और चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जा रही है।”
होली के हुड़दंग को रोकने और शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए मऊगंज पुलिस पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में है। जिले में बल की कमी को देखते हुए पुलिस कप्तान के निर्देश पर पड़ोसी जिले रीवा से 46 अतिरिक्त जवानों की खेप मऊगंज पहुंच चुकी है। अब जिले के 218 स्थानीय जवानों के साथ मिलकर ये ‘बैकअप योद्धा’ सुरक्षा का चक्रव्यूह रच रहे हैं।

सुरक्षा के इस ग्रिड को इतना मजबूत बनाया गया है कि परिंदा भी पर न मार सके। पूरे जिले में 27 संवेदनशील ‘फिक्स्ड पॉइंट’ बनाए गए हैं, जहां हर वक्त 3 जांबाज जवान तैनात रहेंगे। इसके अलावा, 18 मोबाइल पेट्रोलिंग टीमें गलियों और मोहल्लों में लगातार गश्त करेंगी। प्रशासन का साफ संदेश है, अप्रिय स्थिति पनपने से पहले ही उसे कुचल दिया जाएगा।
दरअसल, पुलिस की इस मुस्तैदी के पीछे पिछले साल के गड़रा कांड का वो काला साया है, जिसने पूरे प्रदेश को दहला दिया था। शाहपुर थाना क्षेत्र के गड़रा में हुई हिंसा में एक एएसआई और स्थानीय युवक सनी द्विवेदी की जान चली गई थी। अधिकारियों पर पथराव हुआ था। उस कड़वे अनुभव से सबक लेते हुए इस बार पुलिस रत्ती भर भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
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