वीरेन्द्र गहवई, बिलासपुर। मानसिक रूप से अस्वस्थ, विशेष देखभाल वाले लोगों के संचालित घरौंदा केंद्रों की चिंताजनक स्थिति सामने आई है। बिलासपुर के एक केंद्र में एक दिव्यांग को पलंग से बांधे जाने के अलावा रायपुर के घरौंदा केंद्र में 1 बच्चे समेत 4 महिलाओं की मौत का खुलासा हुआ है। कोर्ट कमिश्नरों ने हाईकोर्ट के समक्ष जवाब में इन स्थितियों का खुलासा किया, जिस पर हाईकोर्ट ने मामले में गंभीरता दिखाते हुए राज्य सरकार से दो हफ्ते में जवाब तलब किया है।

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बता दें कि रायपुर के घरौंदा सेंटर में आठ बच्चों की मौत और पांच बच्चों के गायब होने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया था। पिछले सुनवाई में इसे अमानवीय बताते हुए हाईकोर्ट ने सभी कोर्ट कमिश्नरों को जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा है।

इससे पहले वित्त और समाज कल्याण विभाग के सचिव और मुख्य सचिव ने शपथपत्र प्रस्तुत कर घरौंदा सेंटर्स के बच्चों के बारे में जानकारी दी थी। इसमें बताया गया कि तीन साल में शासन ने 9 करोड़ रुपए बच्चों पर खर्च किए हैं। हाईकोर्ट ने मामले में 11 कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए हैं। इनमें एडवोकेट विवेक श्रीवास्तव, अपूर्व त्रिपाठी, संघर्ष पाण्डेय, शिवाली दुबे, ईश्वर जायसवाल शामिल हैं। इन्होंने शासन और केंद्र की योजनाओं के तहत संचालित सेंटर्स का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट पेश किया है।

रायपुर की संस्था कोपलवाणी ने कोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई है। पिछले 2014 से एनजीओ की मदद से बच्चों के लिए चलाए जा रही संस्था घरौंदा में बच्चों की भूखमरी से मौत मामले में कोर्ट ने शासन से जवाब तलब किया था। मामले में संस्था ने पहले राज्य के बड़े प्रशासनिक अफसरों से लिखित शिकायत की थी।

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