बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में व्याख्याता के रिटायरमेंट के 6 माह बाद जीपीएफ से वसूली आदेश को निरस्त कर दिया है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सेवानिवृत्त होने के 6 माह बाद किसी भी शासकीय अधिकारी या कर्मचारी के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) की राशि से किसी भी प्रकार की वसूली करने को अवैध माना जाएगा.
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जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ निवासी सेवानिवृत्त व्याख्याता लक्ष्मी नारायण तिवारी ने याचिका दाखिल की थी. वे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ससहा में व्याख्याता के पद पर पदस्थ थे. लक्ष्मीनारायण तिवारी 31 जनवरी 2011 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर रिटायरमेंट हुए थे.

रिटायरमेंट के करीब 12 साल बाद महालेखाकार कार्यालय रायपुर ने उनके जीपीएफ खाते में ऋणात्मक शेष दर्शाते हुए उनके खिलाफ वसूली आदेश जारी कर दिया. इस आदेश से क्षुब्ध होकर लक्ष्मीनारायण तिवारी ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर वसूली आदेश को चुनौती दी थी.
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि शासकीय कर्मचारी के रिटायरमेंट के 6 माह के अंदर ही देयकों की वसूली की जा सकती है. इसके बाद वसूली करना नियमों के खिलाफ है.
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के नियम 65 का हवाला देते हुए बताया गया कि यदि किसी शासकीय सेवक के जीपीएफ खाते में ऋणात्मतक शेष पाया जाता है, तो सेवानिवृत्ति की तिथि से केवल 6 माह की अवधि के भीतर ही वसूली की जा सकती है. इसके बाद वसूली कानूनन गलत है.
तर्कों से सहमत होते हुए हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त व्याख्याता लक्ष्मी नारायण तिवारी को राहत प्रदान करते हुए सेवानिवृत्ति के 12 साल बाद जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया है.
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