कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण रिकॉर्ड को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सड़क निर्माण की मूल फाइल नहीं मिलने और अधिकारियों के जवाबों पर अदालत ने नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को अवमानना का नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान चीफ इंजीनियर के उस जवाब पर भी सवाल उठा कि सड़क निर्माण की मूल फाइल सब-इंजीनियर के घर रखी है।

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दरअसल हाईकोर्ट में सड़क निर्माण की गुणवत्ता से जुड़ा मामला पहुंचा था। सुनवाई के दौरान सड़क निर्माण की मूल रिकॉर्ड फाइल उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इस पर हाइकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। चीफ इंजीनियर ने कहा कि मूल फाइल दफ्तर में है,हाइकोर्ट ने उन्हें तत्काल दफ्तर से लाकर कोर्ट में पेश करने कहा, लेकिन जब लौट कर आये तो हाइकोर्ट को बताया कि मूल फाइल सब-इंजीनियर के घर रखी हुई है। अदालत ने इस जवाब पर गंभीर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए,हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सब अधिकारी मिले हुए हैं। 

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अदालत ने चीफ इंजीनियर और सब-इंजीनियर को अवमानना का नोटिस जारी करते हुए दो दिन में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, सड़क निर्माण की मूल रिकॉर्ड फाइल को सील कराकर सरकारी वकील को निगरानी में दिया है। अब अधिकारियों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। मामले में सड़क की गुणवत्ता जांचने वाली एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हाइकोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक एनएचएआई की सड़कों की जांच भी डेढ़ साल से जारी है, लेकिन जांच रिपोर्ट को लेकर अदालत ने नाराजगी जताई। अदालत ने रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। सड़क निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही अब इस मामले का अहम पहलू बन गई है।

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