परवेज खान, शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के रन्नौद क्षेत्र में 26 साल पहले हुए बहुचर्चित दिनेश तिवारी हत्याकांड में ग्वालियर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने रन्नौद के पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष सहित तीनों दोषियों की अपील को सिरे से खारिज करते हुए उनकी आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही कोर्ट ने तीनों दोषियों की जमानत तत्काल प्रभाव से निरस्त कर उन्हें ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने जमानत निरस्त कर दिया सरेंडर का आदेश

ग्वालियर हाईकोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को सही ठहराया है। हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी व पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष अवध बोहरे, ऋषि उपाध्याय और नरहरी बोहरे की उम्रकैद की सजा को कायम रखा है। कोर्ट ने तीनों दोषियों की जमानत याचिका निरस्त करते हुए उन्हें बिना किसी देरी के संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण (Surrender) करने और जेल जाकर अपनी शेष सजा काटने के निर्देश जारी किए हैं।

18 मई 2000 को हुई थी हत्या, 2005 में मिली थी उम्रकैद

इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही 26 वर्षों से इंसाफ का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है। रन्नौद में 18 मई 2000 को दिनेश तिवारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य हत्याकांड से पूरे जिले में भारी आक्रोश और सनसनी फैल गई थी।

2005 में आया था फैसला

मामले की सुनवाई करते हुए विचारण न्यायालय (ट्रायल कोर्ट) ने 22 जून 2005 को अवध बोहरे, ऋषि उपाध्याय और नरहरी बोहरे को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी। लेकिन 26 साल लंबे कानूनी सफर के बाद भी हाईकोर्ट से दोषियों को कोई राहत नहीं मिली और उन्हें अब दोबारा सलाखों के पीछे जाना होगा।

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