हिसार। हरियाणा के हिसार की अदालत ने दवा की गुणवत्ता से जुड़े करीब 18 साल पुराने मामले में गुजरात की प्रमुख दवा निर्माता कंपनी ‘लंकन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड’ के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को दोषी करार दिया है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीनों अधिकारियों मुकेश, महेश और निलेश को चार-चार साल की कैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही कोर्ट ने तीनों दोषियों पर 40-40 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

2008 का है मामला, भूख बढ़ाने वाली दवा में मिला था खेल

यह मामला वर्ष 2008 का है, जब तत्कालीन ड्रग इंस्पेक्टर रमन ने संबंधित दवा का रैंडम नमूना (सैंपल) लिया था और उसे गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा था. लैब जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दवा में इस्तेमाल होने वाला ‘एबीटोल साल्ट’ निर्धारित मानक से काफी कम था. आंकड़ों के अनुसार, दवा में इस मुख्य साल्ट की मात्रा तय सीमा से करीब 20 से 25 प्रतिशत तक कम पाई गई थी. बता दें कि एबीटोल का उपयोग मुख्य रूप से भूख बढ़ाने वाली दवाओं में किया जाता है.

18 साल तक चली सुनवाई के बाद आया फैसला

जांच रिपोर्ट में दवा के अमानक (सब-स्टैंडर्ड) पाए जाने के बाद तत्कालीन ड्रग इंस्पेक्टर ने वर्ष 2008-09 में संबंधित अधिकारियों और कंपनी के खिलाफ हिसार अदालत में औपचारिक शिकायत दायर की थी. इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से लंबे समय तक दलीलें दी गईं. लगभग 18 साल तक चली लंबी अदालती सुनवाई और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों अधिकारियों को दोषी मानते हुए यह कड़ा सजा का फैसला सुनाया.

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